कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने मंगलवार को कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उन्हें फोन कर पद से इस्तीफा देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर भाजपा और जेडीएस नेताओं से चर्चा करने के बाद अपना फैसला लेंगे।
क्या कांग्रेस हाईकमान ने नए सभापति के नाम को मंजूरी दी?
यह घटनाक्रम कांग्रेस हाईकमान की ओर से सोमवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को भेजे गए उस पत्र के बाद सामने आया, जिसमें राज्य विधान परिषद के सभापति पद के लिए सलीम अहमद और उपसभापति पद के लिए उमाश्री के नाम को मंजूरी दी गई। इसी पत्र में सोमवार को शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची भी शामिल थी।
क्या विधानसभा अध्यक्ष और परिषद सभापति का फैसला सदन करता है?
कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए जी.एस. पाटिल और उपाध्यक्ष पद के लिए ए.एस. पोन्नन्ना के नाम को भी मंजूरी दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए होरट्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनसे इस्तीफा देकर सहयोग करने का अनुरोध किया ताकि किसी तरह की असहज स्थिति न बने। उन्होंने कहा कि पहले वह विपक्षी दलों के नेताओं से चर्चा करेंगे और उसके बाद निर्णय लेंगे। आठ बार के एमएलसी होरट्टी का वर्तमान कार्यकाल जुलाई 2028 तक है।
क्या पार्टी हाईकमान सभापति तय कर सकता है?
होरट्टी ने कहा कि विधान परिषद के सभापति और विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव केवल सदन कर सकता है, किसी राजनीतिक दल का हाईकमान नहीं। उन्होंने कहा कि पहली बार किसी पार्टी को विधान परिषद के सभापति का नाम घोषित करते देखा है और यह लोकतंत्र की दृष्टि से उचित नहीं है।
क्या सभापति को हटाने की तय प्रक्रिया है?
उन्होंने कहा कि किसी सभापति को हटाने के लिए कम से कम 10 सदस्यों को 14 दिन पहले नोटिस देकर अविश्वास प्रस्ताव लाना होता है। इसके बाद सदन में चर्चा होती है और उसी के आधार पर फैसला लिया जाता है। उनके अनुसार इस मामले में सदन का निर्णय सर्वोपरि है।
क्या होरट्टी को हटाने का कोई आधार है?
बसवराज होरट्टी ने कहा कि 1956 से अब तक किसी भी सभापति को कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा नहीं देना पड़ा और सभी ने अपना कार्यकाल पूरा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें हटाने का कोई आधार नहीं है। वर्तमान में 75 सदस्यीय कर्नाटक विधान परिषद में कांग्रेस के 38, भाजपा के 24, जेडीएस के 6 सदस्य हैं। इसके अलावा एक निर्दलीय सदस्य, एक सभापति और पांच सीटें रिक्त हैं।

