भारत को कौन-कौन सी तकनीक मिल सकती है?
रूस की ओर से भारत को जिन क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग की पेशकश बताई गई है, उनमें इंजन तकनीक, एईएसए रडार, ऑप्टिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टील्थ या कम दिखाई देने वाली तकनीक, सॉफ्टवेयर और आधुनिक हथियार प्रणाली शामिल हैं। रूसी प्रस्ताव में महत्वपूर्ण हिस्सों का उत्पादन भारत में करने और धीरे-धीरे स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की बात भी शामिल है।
भारत के लिए स्थानीय उत्पादन की बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान में सिर्फ विमान का ढांचा ही महत्वपूर्ण नहीं होता। उसके रडार, इंजन, सेंसर, सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और हथियारों का आपस में तालमेल उसकी वास्तविक क्षमता तय करता है।
क्या भारत के लिए दो सीट वाला एसयू-57 भी विकल्प है?
हां। रूस ने भारत के साथ दो सीट वाले एसयू-57 संस्करण पर मिलकर काम करने की पेशकश भी की है। 2026 में रूस ने खुद एसयू-57डी के दो सीट वाले प्रोटोटाइप की उड़ान शुरू कर दी है।
दो सीट वाले विमान का इस्तेमाल प्रशिक्षण के अलावा युद्ध संचालन में अतिरिक्त भूमिका के लिए किया जा सकता है। यूएसी के मुताबिक, इसे मानवयुक्त और बिना पायलट वाले विमानों के संयुक्त समूह के संचालन और नियंत्रण में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
भारत में उत्पादन की बात क्यों महत्वपूर्ण है?
अगर भारत और रूस के बीच एसयू-57ई के स्थानीय उत्पादन पर सहमति बनती है, तो यह सिर्फ तैयार विमान खरीदने से अलग व्यवस्था होगी। रूस ने भारत में इसके उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने और महत्वपूर्ण हिस्सों को स्थानीय स्तर पर बनाने की पेशकश की है। इससे भारतीय उद्योग को विमान निर्माण, रखरखाव और भविष्य के उन्नयन में ज्यादा भूमिका मिल सकती है।
भारत के पास अभी पांचवीं पीढ़ी का कौन सा विमान है?
भारत के पास फिलहाल कोई भी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान परिचालन सेवा में नहीं है। भारतीय वायुसेना के पास सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान हैं, लेकिन इन्हें पांचवीं पीढ़ी का विमान नहीं माना जाता। भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान एएमसीए यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जो अभी विकास के चरण में है।


