चीन दुनिया में एआई की रेस में सबसे आगे निकलने का सपना देख रहा है, लेकिन इसी तकनीक का एक नया रूप अब उसकी चिंता बढ़ा रहा है। लोग एआई से सिर्फ सवाल नहीं पूछ रहे, बल्कि उससे दोस्ती कर रहे हैं, अपनी निजी बातें बता रहे हैं और उसे साथी तक मानने लगे हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि चीन में एआई का कितना इस्तेमाल होता है? एआई कंपैनियन क्या है? चीन में इसका बाजार कितना बड़ा है? सरकार क्यों चिंतित है? लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है?
चीन में एआई का उपयोग कैसे बढ़ रहा है?
चीन के इंटरनेट नेटवर्क सूचना केंद्र की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 के अंत तक देश में 70 करोड़ से ज्यादा लोग जेनेरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे थे। यह चीन की आधी से ज्यादा आबादी के बराबर है। दिसंबर 2025 के अंत में जेनेरेटिव एआई यूजर्स की संख्या करीब 60.2 करोड़ थी और इसकी पहुंच 42.8 प्रतिशत थी। यानी कुछ ही महीनों में यूजर्स की संख्या में करीब 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
एआई का इस्तेमाल सिर्फ बातचीत या जानकारी लेने तक सीमित नहीं है। करीब 76 प्रतिशत यूजर्स एआई से सवालों के जवाब लेते हैं। 48 प्रतिशत तस्वीरों और वीडियो से जुड़े कामों के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। करीब 38 प्रतिशत टेक्स्ट से जुड़े काम करते हैं, जबकि 33 प्रतिशत लोग काम का सारांश, मीटिंग नोट्स और प्रेजेंटेशन तैयार करने के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं।
चीन की एआई क्षमता सिर्फ यूजर्स की संख्या तक सीमित नहीं है। जून 2026 तक देश की इंटेलिजेंट कंप्यूटिंग क्षमता 2,185 ईफ्लॉप्स पहुंच गई थी, जो एक साल पहले की तुलना में 177 प्रतिशत ज्यादा थी। डीपसीक और मूनशॉट एआई जैसी चीनी कंपनियां बड़े एआई मॉडल भी विकसित कर रही हैं।
एआई और जेनेरेटिव एआई में क्या अंतर?
एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऐसी तकनीक है जो मशीनों को इंसानों की तरह सीखने, समझने और फैसला लेने में सक्षम बनाती है, जबकि जेनेरेटिव एआई इसी का एक प्रकार है, जो नई सामग्री जैसे टेक्स्ट, तस्वीर, वीडियो, आवाज और कोड तैयार कर सकता है। आसान शब्दों में, एआई मशीन को समझदार बनाता है, जबकि जेनेरेटिव एआई उस समझ के आधार पर नई चीजें भी बना सकता है।


