अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां अगला कदम पूरे पश्चिम एशिया की तस्वीर बदल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर खुलकर चेतावनी दी है कि अब फैसला उन्हें करना है और रास्ता ‘आसान’ भी हो सकता है और ‘मुश्किल’ भी। इसी बीच अमेरिका ने न्यूयॉर्क में मौजूद ईरान के दो राजनयिकों को देश से बाहर कर दिया है। दोनों को अमेरिका छोड़ने का आदेश दिया गया था, लेकिन वे आदेश के बावजूद न्यूयॉर्क में रुके हुए थे। इन दोनों घटनाओं ने संकेत दे दिया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच टकराव अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है।
‘अब ईरान पर फैसला होगा’
व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान को लेकर वह जल्द फैसला लेने वाले हैं। उन्होंने कहा, ‘ईरान को तबाह कर दिया गया है। अब सिर्फ सवाल यह है कि यह आसान रास्ते से होगा या मुश्किल रास्ते से।’ट्रंप ने हालांकि यह नहीं बताया कि उनके दिमाग में कौन-सा विकल्प है। उन्होंने अपने अगले कदम को लेकर पूरी तरह से रहस्य बनाए रखा है। यही वजह है कि उनके इस बयान को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अब क्या करने वाला है।
‘मैं बता दूं तो बड़ी खबर बन जाएगी’
ईरान को लेकर ट्रंप पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनसे तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को जब पत्रकारों ने उनसे उनकी अगली रणनीति के बारे में पूछा था, तो उन्होंने साफ कहा कि अगर वह अपनी योजना बता देंगे तो यह ‘बड़ी खबर’ बन जाएगी। इसके बाद ट्रंप ने सिर्फ इतना कहा कि चीजें अच्छी तरह आगे बढ़ रही हैं और ईरान की स्थिति अच्छी नहीं है। यानी अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी रणनीति के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी, लेकिन इतना जरूर साफ कर दिया कि ईरान पर दबाव बनाए रखने की नीति जारी है।
‘ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान’
ट्रंप इससे पहले ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को लेकर भी कई बड़े दावे कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के पास पैसा नहीं है, उसकी मुद्रा की हालत खराब है और वहां महंगाई 301 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता पर भी बड़ा दावा करते हुए कहा कि उसकी नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है और उसकी सैन्य ताकत बुरी तरह कमजोर हो चुकी है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान के पास अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं और संघर्ष ‘एक या दूसरे तरीके से’ बहुत जल्द खत्म हो जाएगा।
तेल के दाम पर भी ट्रंप का बड़ा दावा
ईरान संकट का एक बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। ट्रंप ने दावा किया है कि जैसे ही संघर्ष खत्म होगा, तेल की कीमतें ‘चट्टान की तरह’ नीचे गिरेंगी। यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है।
अमेरिका ने 2 ईरानी राजनयिकों को निकाल दिया
ट्रंप के सख्त बयानों के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक और कार्रवाई कर दी है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क आए ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्यों को अमेरिका से बाहर कर दिया गया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों को कई दिन पहले ही देश छोड़ने के लिए कहा गया था। लेकिन आदेश के बाद भी वे न्यूयॉर्क में मौजूद रहे। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी मिशन को दोबारा निर्देश दिया कि दोनों को तुरंत अमेरिका से बाहर भेजा जाए।
रुबियो का नाम लेकर अमेरिकी अधिकारी ने दी सख्ती की तस्वीर
एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस से कहा,’सेक्रेटरी रुबियो गंभीर हैं।’ अधिकारी के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्य संयुक्त राष्ट्र महासभा खत्म होने के काफी समय बाद भी न्यूयॉर्क में मौजूद थे और अब उन्हें अमेरिका से बाहर कर दिया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन से कहा था कि उसका पूरा प्रतिनिधिमंडल तुरंत अमेरिका छोड़ दे। लेकिन दो सदस्य इसके बाद भी न्यूयॉर्क में रुके रहे।
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एक शुक्रवार रात गया, दूसरा शनिवार सुबह
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, शुक्रवार को ईरानी मिशन को साफ तौर पर बता दिया गया कि अमेरिका को दोनों राजनयिकों के न्यूयॉर्क में मौजूद होने की जानकारी है। इसके बाद उन्हें तत्काल अमेरिका छोड़ने का निर्देश दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, एक राजनयिक शुक्रवार रात न्यूयॉर्क से रवाना हुआ, जबकि दूसरा शनिवार सुबह अमेरिका से बाहर चला गया। दोनों देशों के बीच यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशों को झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता मुश्किल होता जा रहा है और पश्चिम एशिया में फिर से सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में ईरानी राजनयिकों को अमेरिका से निकालना महज एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं माना जा रहा। इसे दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों और वॉशिंगटन की बढ़ती सख्ती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।


