मिडिल ईस्ट में एक बार फिर जंग की स्थिति बनती दिखाई दे रही है. लेबनान पर इजरायली हमलों के विरोध में ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत को रोकने का फैसला किया है. ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक यह फैसला लेबनान में संघर्ष-विराम के इजरायली उल्लंघन के जवाब में लिया गया है.
ईरान ने क्यों रद्द की US के साथ शांति वार्ता?
न्यूज एजेंसी के अनुसार जब तक गाजा और लेबनान के संबंध में उसकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक ईरानी वार्ताकार दल मध्यस्थों के जरिए बातचीत और संदेशों के आदान-प्रदान को रोके रखेंगे. हाल के दिनों में इजरायल ने लेबनान में हमले तेज कर दिया. कई मिडिल ईस्ट और यूरोपीय देशों ने सैन्य कार्रवाई की निंदा की है और इसके बजाय कूटनीति और खून-खराबा को समाप्त करने का आह्वान किया है.
इजरायल का कहना है कि हिजबुल्लाह की ओर से सीजफायर के उल्लंन किया गया है, जिसके जवाब में उसने लेबनान पर हमले बढ़ा दिए हैं. हिजबुल्लाह ने कहा है कि वह लगातार इजरायली हमलों के जवाब में इजरायली सेना पर हमला कर रहा है. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि इजरायल ने आत्मरक्षा के बहाने अपने सैन्य अभियान और गांवों पर गोलाबारी जारी रखी है. उन्होंने कहा, ‘लेबनान कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध है. इससे समस्या पल भर में हल नहीं होगी, बल्कि यह एक प्रक्रिया है जिसमें समय लगेगा और हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है.’
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर नई धमकी
16 अप्रैल को सीजफायर समझौते के बाद इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने लेबनान पर हमले कुछ समय के लिए रोक दिए थे. हालांकि, जल्द ही उन्होंने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले फिर से शुरू कर दिए और दावा किया कि ये रक्षात्मक अभियान थे, जो अमेरिका की मध्यस्थता से हुए सीजफायर के तहत स्वीकार्य थे. ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि तेहरान और उसके सहयोगी समूह अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जलमार्ग पर दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं.
तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक इजरायल ने सभी मोर्चों पर इस सीजफायर का उल्लंघन किया है. तेहरान ने गाजा और लेबनान में इजरायल के युद्ध को तत्काल रोकने के साथ-साथ इजरायली सेना की बेरूत से पूर्ण वापसी की मांग की है और कहा है कि जब तक इन मामलों पर ईरान और प्रतिरोध की स्थिति संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी.
अराघची ने ईरान को दी धमकी
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर स्पष्ट रूप से लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम है. एक मोर्चे पर इसका उल्लंघन सभी मोर्चों पर युद्धविराम का उल्लंघन है. किसी भी उल्लंघन के परिणामों के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार हैं.’
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है. इसे लेकर इस्लामाबाद टॉक का आयोजन किया गया, जिसमें अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहुंचे थे, लेकिन ये वार्ता फेल साबित हुई. वहीं पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी इसे लेकर ईरान का दौरा चुके हैं.
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