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‘ईरान के पास नहीं होगा कभी परमाणु हथियार’, 9/11 की बरसी पर बरसे डोनाल्ड ट्रंप

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9/11 जैसे घातक आतंकी हमले की बरसी पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए, शुक्रवार को कहा है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. उन्होंने तेहरान के साथ वॉशिंगटन के इस टकराव को सही ठहराया है. 

व्हाइट हाउस में एक सभा के दौरान ट्रंप ने कहा, ‘हम अपने फर्स्ट रिस्पॉन्डर और कानून लागू करने वाले अधिकारियों को सलाम करते है. उनसे प्यार करते हैं. हम उन सर्विस मेंबर्स को भी सलाम करते हैं, जो यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले नंबर 1 देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हो.’ 

ट्रंप प्रशासन ने साल 2024 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के बाद सत्ता में लौटने के बाद से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध किया है. ट्रंप का कहना है कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म करना चाहिए. उसने लगातार ईरान के परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की धमकी दी है. 

इधर, ईरान ने बार-बार कहा है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम नागरिक इस्तेमाल के लिए है. देश न्यूक्लियर हथियार नहीं बना रहा है. ईरान ने यूएन की परमाणु निगरानी संस्था के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की तरफ से हाल ही में पारित उस प्रस्ताव की निदा की है, जिसमें ईऱान के परमाणु नियमों का पालन न करने के कारण मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजा गया था.

ईरान भारी दबाव महसूस कर रहा

इधर, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी में ईरान के प्रतिनिधि रजा नजाफी ने सरकारी टीवी से बात करते हुए कहा है कि यह प्रस्ताव अमेरिका और उसके सहयोगियों के राजनीतिक दवाब के कारण पारित किया गया था. ईरान के मुताबिक, वह भारी दबाव का सामना कर रहा है. अमेरिका के साथ टकराव के कारण देश एक नाजुक और खतरनाक दौर में है. 

उन्होंने बताया कि उसने पश्चिम देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की है. इसके जवाब में तेहरान ने हॉर्मुज को ब्लॉक कर दिया है. यह ईरान और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण और संकरा जलमार्ग है. इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर कहा है कि हाल के सालों में ईरान पर भारी प्रतिबंध लगाए गए हैं.

अमेरिका और इजरायल की सैन्य आक्रामकता के बाद हाल के महीनों में यह दबाव एक नाजुक और खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. जब किसी देश खे व्यापार, एनर्जी, बुनियादी ढांचे और वित्तीय प्रणाली पर राजनीतिक और सैन्य प्रेशर डाला जाता है, तो इसके परिणाम उसकी सीमाओं से परे तक फैल जाते हैं. 


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