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ईरान के खिलाफ जंग में कूदेगा पाकिस्तान? हूतियों ने सऊदी पर दागी मिसाइल तो भड़का इस्लामाबाद, कहा- ये हमारी रेड लाइन

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ईरान और अमेरिका के बीच डील कराने में जुटा पाकिस्तान अब युद्ध में भी उतर सकता है. ऐसी अटकलें इसलिए लगाई जा रही हैं क्योंकि यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलें दागी हैं. इस अटैक के बाद इस्लामाबाद को सऊदी और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना मुश्किल हो सकता है.

पाकिस्तान ने पिछले साल सऊदी अरब के साथ एक डिफेंस डील पर साइन किए थे, जिसके बाद उसके हजारों सैनिक सऊदी अरब में तैनात हैं. अब ऐसी आशंका है कि सऊदी और ईरान के बीच तनाव बढ़ सकता है, जो पाकिस्तान को भी युद्ध में घसीट सकता है.

ये हमारी रेड लाइन है: PAK

पाकिस्तान के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, ‘हमारी सरकार और फील्ड मार्शल ने ईरान की टॉप लीडरशिप को क्लीयर कर दिया है कि सऊदी अरब पर हमले पाकिस्तान पर हमले हैं. यह हमारी रेड लाइन है.’

इस्लामाबाद ने पहले ही सऊदी अरब पर ईरान के हमलों को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन अधिकारियों और विश्लेषकों ने रॉयटर्स को बताया कि हाल ही में हुए हूती हमलों ने इस्लामाबाद की चिंता को काफी बढ़ा दिया है. सिक्योरिटी एक्सपर्ट मुहम्मद आमिर राणा ने कहा कि पाकिस्तान को इतनी जल्दी तनाव बढ़ने की उम्मीद नहीं थी. अधिकारियों को यह भी आशंका है कि हूती विद्रोहियों के और हमले सऊदी-यमन सीमा के पास तैनात पाकिस्तानी सैनिकों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं और रियाद के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत इस्लामाबाद पर जवाबी कार्रवाई करने का दबाव बढ़ा सकते हैं.

पाकिस्तान को क्या है चिंता?

रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरल गुलाम मुस्तफा ने कहा कि लीडरशिप अभी भी दोनों पक्षों को शांत करने में लगी हुई है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हूती सऊदी अरब के अंदर अपने हमले बढ़ाते हैं तो हालात बदल सकते हैं. इस्लामाबाद को ये भी चिंता है कि इस रीजन में संघर्ष से लाल सागर के माध्यम से होने वाला समुद्री व्यापार बाधित हो सकता है.

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पाकिस्तान की मध्यस्थता ईरान को होगी स्वीकार?
 
रिपोर्ट के मुताबिक, हूती-सऊदी के बीच हालिया तनाव ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका को और अधिक कठिन बना दिया है, हालांकि पिछले महीने दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते में मध्यस्थता करने में पाकिस्तान ने मदद की थी. एक पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि बढ़ती निराशा के बावजूद पाकिस्तान मध्यस्थता के लिए प्रतिबद्ध है.

पाकिस्तानी अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा, ‘हां निराशा तो है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता को छोड़ रहे हैं. हमने इसमें बहुत निवेश किया है और हम इसे जारी रखने में रुचि रखते हैं.’
 
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी. उन्होंने कहा, ‘निरंतर जुड़ाव, संवाद और कूटनीति का कोई विकल्प नहीं है.’

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