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अमिताभ बच्चन को इस शख्स ने बनाया अरबपति, कौन हैं प्रेमचंद गोधा, जो 15 हजार करोड़ के हैं मालिक

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  • प्रेमचंद गोधा, किसान परिवार से, अमिताभ बच्चन के CA बने.
  • 1975 में बच्चन परिवार संग घाटे वाली Ipca खरीदी.
  • 1983 में MD बनकर, कंपनी को शिखर पर पहुंचाया.
  • आज Ipca 120+ देशों में, 48000 करोड़ की कंपनी.

Amitabh Bachchan CA: किसी जमाने में बॉलीवुड  सुपरस्टार अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) रहे प्रेमचंद गोधा (Premchand Godha) की फर्श से अर्श तक की कहानी वाकई में काफी दिलचस्प और प्रेरणादायक हैं. राजस्थान के एक किसान परिवार में पैदा हुए प्रेमचंद गोधा आज दवा कंपनी इप्‍का लैबोरेटरीज (Ipca Laboratories) के मैनेजिंग डायरेक्टर है, जिसका मार्केट कैप 48000 करोड़ रुपये है. वह खुद लगभग 15400 (1.6 बिलियन डॉलर) की संपत्ति के मालिक हैं.

तंगहाली में बीता बचपन

हालांकि, एक वक्त ऐसा भी था, जब उनके या उनके परिवार के पास पैसे नहीं थे. किसान परिवार से होने के नाते उन्होंने बचपन में अपने माता-पिता को आर्थिक तंगी से जूझते हुए देखा है. माता-पिता को खेतों में कड़ी मेहनत करते हुए देख प्रेमचंद भी लगन से पढ़ाई में जुट गए. वक्त बीतता गया और उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में अपनी ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी की.

बच्चन परिवार संग जुड़ने का मौका

ग्रैजुएशन के बाद प्रेमचंद ने अपनी मेहनत और काबिलियत के बलबूते इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) से सीए की डिग्री हासिल की. 1971 में गोधा ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. उनकी इसी काबिलियत को देखते हुए उस दौरान बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने उन्हें अपने फाइनेंशियल एडवाइजर और चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर काम करने का मौका दिया. उन्होंने कई सालों तक बच्चन परिवार के फाइनेंस को बड़ी जिम्मेदारी के साथ संभाला. इस दौरान उन्हें बिजनेस मैनेजमेंट और कॉर्पोरेट फाइनेंस की भी गहरी समझ हुई. 

बच्चन परिवार के साथ मिलकर खरीदी कंपनी

साल 1975 उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब उन्होंने बच्चन परिवार के साथ मिलकर इप्‍का लैबोरेटरीज (Ipca Laboratories) को खरीदने का फैसला किया, जो पहले से ही घाटे में चल रही एक कंपनी थी. प्रेमचंद गोधा ने जब इस कंपनी की बागडोर संभाली, तो इसका सालाना रेवेन्यू महज 54 लाख था. कंपनी एक तरह से डूबने के कगार पर खड़ी थी. प्रेमचंद ने इसे खड़ा करने में अपनी पूरी जान लगा दी. यह उनकी रणनीतिक सूझबूझ का ही नतीजा था कि उन्हें 1983 में कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) नियुक्त किया गया. 

अकेले डटे रहे प्रेमचंद

साल 1999 में प्रोडक्शन हाउस ABCL की वजह से बच्चन परिवार भारी कर्ज में डूब गया और उन्हें मजबूरन कंपनी में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचनी पड़ी. प्रेमचंद बिना घबराए डटे रहे और कंपनी का भरपूर साथ दिया और इसे आगे बढ़ाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी. आज के वक्त इप्‍का लैबोरेटरीज का कारोबार 120 से अधिक देशों में फैला हुआ है. कंपनी का रेवेन्यू 9400 रुपये से भी ज्यादा है. कंपनी डायबिटीज, मलेरिया, हार्ट डिजीज जैसी कई और अलग-अलग तरह की बीमारियों के लिए 350 से अधिक फॉर्मुलेशन और 80 एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स प्रोडक्ट्स भी बनाती है. 

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