लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

ईरान की जंग का नया चेहरा: मोहम्मद बाकेर क़ालिबाफ के हाथ में कमान, खामेनेई के बाद सत्ता और युद्ध रणनीति पर कड़ा नियंत्रण

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

ईरान की राजनीति और मिलिट्री रणनीति में अचानक आए बड़े बदलाव के बीच एक नाम तेजी से केंद्र में आया है – मोहम्मद बाकेर क़ालिबाफ. रिपोर्ट्स के मुताबिक अली लारिजानी की मौत के बाद ईरानी शासन के युद्ध प्रयासों की कमान अब क़ालिबाफ के हाथों में मानी जा रही है. इससे न सिर्फ तेहरान की आंतरिक सत्ता संरचना बदली है, बल्कि रीजनल तनाव की दिशा भी प्रभावित हो सकती है.

पूर्व पुलिस प्रमुख और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े रहे क़ालिबाफ लंबे समय से ईरान की सत्ता के करीब रहे और मजबूत स्तंभ माने जाते हैं. 2005 में उन्होंने राष्ट्रपति पद की दौड़ में उतरकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी. इसके बाद तेहरान के मेयर और फिर ईरानी संसद के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने ईरान की राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत की.

2024 में राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद क़ालिबाफ ने एक बार फिर राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फैसला किया था. हालांकि वह दो बार पहले भी चुनाव हार चुके थे और एक बार कट्टरपंथी वोटों के बंटवारे से बचने के लिए पीछे हट गए थे, लेकिन उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा लगातार कायम रही.

क़ालिबाफ का आक्रामक रवैया

वर्तमान संकट में क़ालिबाफ का रुख बेहद आक्रामक नजर आ रहा है. इसी महीने में उन्होंने अमेरिका और इज़राइल के नेतृत्व पर सीधे निशाना साधते हुए कहा, “यहीं पर, बहुत स्पष्ट और साफ तौर पर, मैं ट्रंप और नेतन्याहू और उनके एजेंटों और प्रॉक्सी से कहता हूं, मैं दोहराता हूं, इन दो गंदे अपराधियों और उनके सभी एजेंटों से कहता हूं: आपने हमारी लाल रेखा पार कर ली है, और आपको इसकी कीमत चुकानी होगी.”

यह बयान ऐसे समय आया था जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हवाई हमलों में मौत की खबर सामने आई. इस घटना ने देश के सत्ता समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया. अब युद्धकालीन रणनीति और कूटनीतिक फैसलों में क़ालिबाफ की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है.

पुतिन से मुलाकात के बाद क्या दिया था संदेश 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी क़ालिबाफ की सक्रियता बढ़ी है. 2024 में ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी मुलाकात ने संकेत दिया था कि ईरान रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के रास्ते पर है.

विश्लेषकों का मानना है कि क़ालिबाफ की सैन्य पृष्ठभूमि और सख्त राजनीतिक रुख ईरान की मौजूदा नीति को और आक्रामक बना सकता है. इससे मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव और गहराने की आशंका है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, कूटनीति और सुरक्षा संतुलन पर पड़ सकता है.

यह भी पढ़ें : तेल के बाद मिडिल ईस्ट में बिजली पर जंग! ईरान की गल्फ देशों को खुली धमकी- अमेरिकी ठिकानों को सप्लाई की तो…

]
Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Chinmoy Krishna Das: जमानत मिली, लेकिन राहत नहीं! बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास क्यों जेल में रहेंगे

अब मालामाल होगा पाकिस्तान! हाथ लगा ‘काला सोना’, एक्सपर्ट्स बोले- अब आने वाले है अच्छे दिन

बालेन के आदेश से भारतीय सीमा पर बवाल, कस्टम ड्यूटी और भारतीय वाहनों को लेकर सख्ती से नेपाल में सियासी तूफान

UAE का कर्ज चुकाने के लिए पाकिस्तान ने सऊदी से मांगी मदद? मोहम्मद बिन सलमान बोले- ये लो 2,000,000,000 डॉलर और…

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से हटाई नाकेबंदी, सीजफायर तक खोला जलमार्ग; विदेश मंत्री अराघटी ने की घोषणा

होर्मुज तो खुल गया, लेकिन जारी रहेगी US नाकेबंदी, ट्रंप के बयान से मची हलचल, क्या भारतीय जहाजों पर पड़ेगा असर?

Leave a Comment