<p style="text-align: justify;">बांग्लादेश के चटगांव की एक अदालत ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को एक मामले में जमानत दे दी है. यह फैसला गुरुवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट सखावत हुसैन ने सुनाया. हालांकि, उनके खिलाफ अन्य कई गंभीर मामले दर्ज होने की वजह से वे अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे और पुलिस हिरासत में ही रहेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;">जिस मामले में उन्हें जमानत मिली है, वह साल 2023 का है. इस केस को पूर्व मंत्री मीर मोहम्मद नासिर उद्दीन ने दर्ज कराया था. आरोप है कि चटगांव के हठजारी इलाके में जमीन कब्जाने, धमकाने और मारपीट की घटना हुई थी. इस मामले में चिन्मय कृष्ण दास सहित कुल छह लोगों को आरोपी बनाया गया था. उनके वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि इसी केस में अदालत ने उन्हें राहत दी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>चिन्मय दास की मुश्किलें नहीं हुई खत्म</strong></p>
<p style="text-align: justify;">चिन्मय दास की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं, क्योंकि उन पर और भी गंभीर आरोप हैं. 26 नवंबर 2024 को देशद्रोह के एक मामले में सुनवाई के दौरान हिंसा भड़क गई थी. इस दौरान वकील सैफुल इस्लाम की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद उनके पिता ने 31 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था. इस मामले में पुलिस ने 1 जुलाई को ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी. पुलिस का कहना है कि वकील की हत्या चिन्मय कृष्ण दास के उकसाने और निर्देश देने पर हुई थी. 25 अगस्त को अदालत ने इस चार्जशीट को स्वीकार कर लिया था और कुल 39 लोगों के खिलाफ मामला चल रहा है. फिलहाल यह मामला कोर्ट में चल रहा है और गवाहों की गवाही ली जा रही है. इसलिए एक केस में जमानत मिलने के बावजूद चिन्मय कृष्ण दास को अभी जेल में ही रहना होगा.</p>
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Chinmoy Krishna Das: जमानत मिली, लेकिन राहत नहीं! बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास क्यों जेल में रहेंगे
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