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ईरान-अमेरिका सीजफायर के बीच इजरायल का बड़ा दावा- ‘हमने मार गिराया हिजबुल्लाह चीफ कासिम नईम का भतीजा’

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अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिन के सीजफायर पर सहमति भले बन चुकी हो, लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव अभी भी बरकरार है. इसी बीच इजरायल ने हिज्बुल्लाह चीफ नईम कासिम के भतीजे अली यूसुफ हारशी को मार गिराने का बड़ा दावा किया है. हालांकि अभी तक हिजबुल्लाह की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.

इजरायली सेना ने कहा, ‘आईडीएफ ने बेरूत क्षेत्र में हमला किया और हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम के पर्सनल सेक्रेटरी और भतीजे अली यूसुफ हारशी को मार गिराया.’

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने गुरुवार (9 अप्रैल) को ऐलान किया है कि उसने लेबनान की राजधानी बेरूत में रात भर चले हमले में ईरान समर्थित लेबनानी समूह हिजबुल्लाह के चीफ नईम कासिम को मार गिराया है. अगर हिजबुल्लाह नईम कासिम के भतीजे की मौत की पुष्टि करता है तो यह सशस्त्र ग्रुप और तेहरान के लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि हिजबुल्लाह मध्य पूर्व में ईरान के प्रमुख सहयोगियों में से एक है.

इजरायल ने लेबनान में तेज किए हमले

ईरान के साथ सीजफायर पर बनी सहमति के बाद भी लेबनान पर इजरायल के ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. बुधवार (8 अप्रैल) से अब तक इजरायली हमलों में 254 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि  1165 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. हमले में लेबनान के इमाम की भी मौत हुई है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं रहेगा.

अराघची ने दी चेतावनी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान पर हमले रोकने की चेतावनी दी है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रोके गए तो ईरान सीजफायर के समझौते को रद्द कर देगा. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘ईरान-अमेरिका युद्धविराम की शर्तें स्पष्ट हैं, अमेरिका को या तो युद्धविराम चुनना होगा या इजरायल के माध्यम से युद्ध जारी रखना होगा. वह दोनों नहीं चुन सकता.’

कौन हैं नईम कासिम?

hezbollah.org के मुताबिक, नईम कासिम का जन्म दक्षिणी लेबनान के नबातियेह प्रांत के कफर किला गांव में हुआ था. कासिम हिजबुल्लाह के मुख्य विचारकों में से एक हैं और इसके फाउंडिंग मेंबर्स में से एक हैं. कासिम ने 1970 में लेबनानी विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में विज्ञान ग्रेजुएशन किया था, साथ ही साथ इस्लामी विद्वान अयातुल्ला मोहम्मद हुसैन फदलल्लाह के अधीन अपने धार्मिक और धार्मिक अध्ययन को आगे बढ़ाया. वह 1974-1988 तक एसोसिएशन फॉर इस्लामिक धार्मिक शिक्षा के प्रमुख थे और लेबनानी मुस्लिम छात्रों के संघ के संस्थापक सदस्य भी थे. 

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