इंजीनियरिंग के छात्र साहिल वकोडे (22) की आत्महत्या के बाद आईआईटी बॉम्बे पूरी तरह आंदोलित हो गया है। अपनी मांगों को लेकर जहां छात्र आंदोलित हैं वहीं मामले में निशाने पर आए प्रशासनिक मामलों के डीन सूर्य नारायण डूला के समर्थन और विरोध को लेकर शिक्षक और छात्र सभी आंदोलित हैं। विवाद में संस्थान के पूर्व छात्र, दूसरे आईआईटी के शिक्षक भी कूद पड़े हैं।
आईआईटी बॉम्बे ने सोमवार को छात्रों की मांगों के आगे झुकते हुए डीन डूला को पद से हटा दिया। संस्थान ने बिना विस्तृत जांच के साहिल को बदनाम करने के लिए माफी भी मांगी। संस्थान ने कहा, बिना जांच के टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। संस्थान ने उस बयान से भी किनारा कर लिया, जिसमें कहा गया था कि साहिल को परीक्षा में स्मार्टफोन और चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर नकल करते पकड़ा गया था। साहिल ने 18 सितंबर को पंखे से फंदा लगा लिया था।
संस्थान के निदेशक शिरीष केदारे ने कहा कि आगे की कार्रवाई जांच के बाद होगी। इस साल संस्थान में छात्र आत्महत्या की यह तीसरी घटना है।
पढ़ाई में अच्छा था साहिल, तीन माह से परेशान करने का आरोप
साहिल को 10वीं में 90% और 12वीं में 76% अंक मिले थे। यहां तक कि आईआईटी बॉम्बे के पहले वर्ष उसने 8.5 सीजीपीए हासिल किया था। ऐसे में परीक्षा में स्मार्ट फोन के इस्तेमाल की बात परिजनों के गले नहीं उतर रही। पिता रवींद्र वकोडे ने कहा, साहिल ने बताया था कि प्रो. डूला उसे तीन माह से परेशान कर रहे थे। जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते थे। इस बयान के कारण पुलिस ने डूला एससी-एसटी एक्ट की धाराएं लगाई हैं।
निदेशक के इस्तीफे पर अड़े छात्र, केदारे का इनकार
छात्रों ने डीन के हटाए जाने से असंतोष जताते हुए कहा कि संस्थान निदेशक और डीन डूला को इस्तीफा देना ही होगा। हालांकि निदेशक केदारे ने इस्तीफा देने से इन्कार कर दिया है। आंदोलनकारी छात्रों ने इसके अलावा परीक्षा से जुड़े अन्य अधिकारियों का इस्तीफा, परीक्षा व अकादमिक कमेटियों में छात्रों का प्रतिनिधित्व और अतीत में हुई छात्र आत्महत्याओं की एसआईटी जांच की मांग की है।
छात्रों ने डीन के हटाए जाने से असंतोष जताते हुए कहा कि संस्थान निदेशक और डीन डूला को इस्तीफा देना ही होगा। हालांकि निदेशक केदारे ने इस्तीफा देने से इन्कार कर दिया है। आंदोलनकारी छात्रों ने इसके अलावा परीक्षा से जुड़े अन्य अधिकारियों का इस्तीफा, परीक्षा व अकादमिक कमेटियों में छात्रों का प्रतिनिधित्व और अतीत में हुई छात्र आत्महत्याओं की एसआईटी जांच की मांग की है।
बढ़ा मतभेद : ह्यूमेनिटीज और स्टेम के छात्र आमने-सामने
आईआईटी बॉम्बे के परिसर में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व गणित (स्टेम) के छात्रों ने सोमवार को ह्यूमेनिटीज (इतिहास, साहित्य, समाजशास्त्र) के छात्रों के सामने प्रदर्शन किया। स्टेम के विद्यार्थियों ने प्रदर्शन करते हुए संस्थान से वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के खिलाफ नारे लगाए। लंबे समय से यह विवाद बना हुआ है कि क्या एक प्रौद्योगिकी संस्थान में ह्यूमेनिटीज के कोर्स चलने चाहिए।
डीन के पक्ष में शिक्षक, आईआईटी मद्रास-दिल्ली के टीचर भी साथ
डूला को पद से हटाने को लेकर संस्थान के शिक्षकों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने इसके खिलाफ विरोध मार्च निकाला। आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने कहा, 18 सितंबर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की निष्पक्ष जांच के लिए डूला को सिर्फ अस्थायी रूप से डीन के पद से हटाया गया है, न कि निलंबित किया गया है। वह अब भी संस्थान के शिक्षक हैं और फोरम डूला के साथ मजबूती से खड़ा है। आईआईटी मद्रास और आईआईटी दिल्ली के फैकल्टी एसोसिएशन ने भी प्रोफेसर डूला का समर्थन करते हुए कहा कि वह सिर्फ अपना काम कर रहे थे। शिक्षकों ने निष्पक्ष जांच की मांग की और बिना जांच पूरी हुए किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से जिम्मेदार ठहराने या मीडिया ट्रायल से बचने की अपील की है।
पूर्व छात्र भी समर्थन में
प्रो. डूला के समर्थन में आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्रों के संगठन और पूर्व शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया है। पूर्व छात्रों ने कहा, हम वर्तमान के बारे में जानने का दावा नहीं करते, लेकिन उन्हें चरित्र, आदर्श, विचारों और छात्रों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से जानते हैं।
कुछ शिक्षकों ने फोरम के खिलाफ उठाई आवाज
आईआईटी बॉम्बे के सोशियोलॉजी के प्रोफेसर सूर्यकांत वाघमोरे ने फैकल्टी फोरम से उलट राय जाहिर की और कहा, फोरम को कोई कानूनी मान्यता हासिल नहीं है। डूला के समर्थन में विरोध मार्च निकालकर वे संस्थान की ओर से हो रही जांच पर दबाव बना रहे हैं। क्या डीन का पद जन्मसिद्ध अधिकार है? उन्होंने यह भी दावा किया कि फोरम से असहमत शिक्षक भी जल्द ही इस मामले में सड़क पर उतरेंगे।
दो बार शिक्षण का उत्कृष्टता पुरस्कार : फोरम ने कहा, डूला का शिक्षण कॅरिअर शानदार रहा है। उन्हें दो बार शिक्षण के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार मिला है।
दो माह पहले राजस्थान के छात्र ने भी की थी खुदकुशी, उठे थे सवाल
आईआईटी बॉम्बे के छात्र राजस्थान के सोहिल सांगवान ने भी 28 जुलाई को खुदकुशी की थी। अब उसके चाचा ने सवाल उठाते हुए कहा, संस्थान या पुलिस ने आज तक हमें संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उसका लैपटॉप, फोन या अन्य दस्तावेज भी नहीं दिया गया। इस बीच, महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने कहा, एक छात्र ने जान गंवाई है और हम इसकी कीमत जानते हैं। साहिल वकोडे की खुदकुशी को जाति के चश्मे से देखना गलत है।
आईआईटी खड़गपुर के निदेशक का छात्रों को भावुक संदेश
आईआईटी बॉम्बे में चले रहे विवाद के बीच आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने छात्रों के नाम भावुक संदेश दिया है। प्रो. चक्रवर्ती ने संदेश में कहा, जब आप परीक्षा हॉल में जाएं, तो यह याद रखें, परीक्षा सिर्फ यह मापती है कि उस खास एक दिन में आपने क्या लिखा। यह यह नहीं मापती कि आप कौन हैं या भविष्य में क्या बनेंगे। आपने वर्षों की मेहनत से आईआईटी खड़गपुर में अपनी जगह बनाई है, और वह ताकत अब भी आपके साथ है। अपनी तैयारी पर भरोसा रखें। गहरी सांस लें। एक बार में एक ही सवाल हल करें। जब भी आपको दबाव महसूस हो, तो याद रखें कि आप अकेले इसका सामना नहीं कर रहे हैं। मेरा हाथ हमेशा आपके कंधे पर है। यह संस्थान आपके अच्छे और मुश्किल, दोनों तरह के दिनों में आपके साथ खड़ा है। पूरी ईमानदारी और लगन से परीक्षा दें। मैं बस यही चाहता हूं, और इतना ही काफी है।

