लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

Explained: ईरान पर सऊदी के कंधे से बंदूक चलाएगा अमेरिका! इजरायल को क्यों हजम नहीं हो रहा न्यूक्लियर प्रोग्राम?

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

<p style="text-align: justify;">21 जुलाई 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति <a title="डोनाल्ड ट्रंप" href="https://www.abplive.com/topic/donald-trump" data-type="interlinkingkeywords">डोनाल्ड ट्रंप</a> ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौते को मंजूरी दे दी. इसके तहत सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन करने की अनुमति मिल सकती है. यह 30 साल का समझौता है, जिसमें अमेरिकी कंपनियों को सऊदी के नागरिक परमाणु कार्यक्रम को विकसित करने में अहम भूमिका दी जाएगी. यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं. ट्रंप ने यह समझौता सऊदी अरब को इजरायल मान्यता देने की शर्त के बिना किया है, जबकि बाइडेन प्रशासन यह शर्त रखता था. <em><strong>आखिर इसके नतीजे क्या निकलेंगे…</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अमेरिका से समझौते में सऊदी अरब को क्या मिला?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सऊदी अरब को इस समझौते से 5 बड़ी चीजें मिली हैं:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>यूरेनियम संवर्धन की इजाजत:</strong> सऊदी अरब को अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम संवर्धन करने की अनुमति मिल सकती है. हालांकि, यह तभी मुमकिन होगा जब एक जॉइंट अमेरिकी-सऊदी स्टडी में इसे सही ठहराया जाए.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कोई ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ नहीं:</strong> इस समझौते में वह ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ (UAE मॉडल) शामिल नहीं है, जो संवर्धन और रिप्रोसेसिंग पर पूरी तरह रोक लगाता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>IAEA की सख्त निगरानी नहीं:</strong> इस समझौते में IAEA के एडिशनल प्रोटोकॉल को शामिल नहीं किया गया है, जो ज्यादा निरीक्षण और सत्यापन की अनुमति देता.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>इजरायल मान्यता की शर्त नहीं:</strong> ट्रंप ने इस समझौते को सऊदी अरब से इजरायल को मान्यता देने की शर्त से अलग कर दिया.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कांग्रेस की मंजूरी जरूरी:</strong> इस समझौते को अमेरिकी कांग्रेस के पास ‘123 एग्रीमेंट’ के रूप में भेजा जाएगा. कांग्रेस इसे रोक सकती है, लेकिन ट्रंप के वीटो को ओवरराइड करने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>तो क्या ईरान के खिलाफ अब सऊदी अरब लड़ेगा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स इसके जवाब को दो पैमानों पर देखते हैं:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>सऊदी अरब की इच्छा:</strong> सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पहले ही कहा है, ‘अगर ईरान ने परमाणु बम बना लिया, तो सऊदी भी परमाणु हथियार हासिल करेगा.’ यानी सऊदी की नजर ईरान को संतुलित करने पर है, न कि उसके खिलाफ जंग लड़ने पर.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>अमेरिकी रणनीति:</strong> यह समझौता ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका-सऊदी संबंधों को मजबूत करने के लिए किया गया है. इसका मकसद सऊदी को अमेरिका के करीब लाना है, ताकि ईरान के खिलाफ मोर्चा मजबूत हो.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सऊदी अरब सीधे ईरान के खिलाफ युद्ध लड़ेगा. सऊदी के पास अभी परमाणु हथियार नहीं हैं. यह समझौता सऊदी को एक परमाणु-सक्षम राज्य बनने का रास्ता देता है, जो ईरान के खिलाफ एक स्ट्रैटेजिक बैलेंस पैदा करेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इजरायल का रिएक्शन: ‘पागलपन भरी परमाणु होड़'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इजरायल से इस फैसले को लेकर बेहद तीखी प्रतिक्रिया आई है. हालांकि, सरकार की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन पूर्व रक्षा मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर विरोध किया है.</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>अविग्डोर लिबरमैन, पूर्व रक्षा मंत्री:</strong> लिबरमैन ने कहा, ‘हर सैन्य परमाणु कार्यक्रम एक नागरिक कार्यक्रम के रूप में शुरू होता है. सऊदी धरती पर संवर्धन की अनुमति देना एक रेड लाइन को पार करता है.’ उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘यह पूरे मिडिल ईस्ट को पागलपन भरी परमाणु होड़ में धकेल देगा.’ लिबरमैन ने इजरायल से मांग की है कि वह अमेरिकी-इजरायल लॉबी (AIPAC) और प्रो-इजरायल ग्रुप्स के साथ मिलकर अमेरिकी कांग्रेस में इस समझौते को रोकने के लिए लॉबिंग करे.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>एहुद बराक, पूर्व प्रधानमंत्री:</strong> बराक ने कहा कि इस समझौते में इजरायल के साथ नॉर्मलाइजेशन की शर्त नहीं होना ‘नेतन्याहू और ट्रंप के बीच भरोसे की कमी का संकेत है.’ उन्होंने कहा कि अगर यह सख्त अमेरिकी निगरानी और सामान्यीकरण के साथ होता, तो शायद हमें मंजूर होता.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>अमीचाई एलियाहू, हेरिटेज मंत्री:</strong> एलियाहू ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अपनी विदेश नीति में इस संभावना को रोकने के लिए हम पूरी कोशिश करेंगे.’ उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, ‘आज सऊदी अरब सही दिशा में है, लेकिन कल यह हमारे खिलाफ हो सकता है.'</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>इजरायली अधिकारियों की फिक्र जुदा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ynet की रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ इजरायली अधिकारियों ने निजी तौर पर माना है कि यह विकास यरुशलम के लिए नकारात्मक है. उन्होंने कहा कि सामान्यीकरण की शर्त हटाने से इजरायल का सऊदी पर दबाव कम हो गया है. पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जेरेमी इसाकरॉफ ने कहा, ‘सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देना बहुत चिंताजनक है.'</p>
<p style="text-align: justify;">ब्रिगेडियर जनरल (रि) याकोव नागल कहते हैं कि सऊदी धरती पर किसी भी तरह का यूरेनियम संवर्धन गलत है. उन्होंने सुझाव दिया कि सऊदी को &nbsp; बिजली उत्पादन के लिए रिएक्टर तो बनाने चाहिए, लेकिन संवर्धन की स्वतंत्र क्षमता नहीं दी जानी चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अमेरिका और सऊदी की डील से क्या बदलाव आएगा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह समझौता मध्य पूर्व की ताकत के संतुलन को बदल सकता है. इसकी तीन बड़ी बातें हैं:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>सऊदी अरब के लिए:</strong> परमाणु ऊर्जा और संवर्धन तकनीक मिल रही है. यह उसे ईरान के बराबर ला सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>अमेरिका के लिए:</strong> ईरान युद्ध के दौरान सऊदी अरब को अपने करीब रखने की रणनीति है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>इजरायल के लिए:</strong> यह सबसे बड़ा झटका है. इजरायल ने हमेशा कहा कि कोई भी अरब देश परमाणु हथियार नहीं रख सकता. अब सऊदी अरब को संवर्धन की इजाजत मिल रही है और वह भी बिना किसी सख्त शर्त के.</li>
</ul>
]
Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Leave a Comment