अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान मध्यस्थता की कोशिशों को तेज कर रहा है. पहली वार्ता विफल होने के बाद दूसरे राउंड की वार्ता को लेकर पाकिस्तान की घबराहट साफ नजर आ रही है. पाकिस्तान के चीफ मार्शल असीम मुनीर अगले राउंड की वार्ता को लेकर बातचीत करने के लिए ईरान पहुंचे हैं. वहीं दूसरी तरफ आर्थिक मदद के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किए के दौरे पर हैं.
दरअसल, पाकिस्तान की घबराहट की कई वजहें हैं. पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनकर ना केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारना चाहता है, बल्कि आर्थिक राहत की भी उम्मीद कर रहा है. अमेरिका की ओर से ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से पाकिस्तान के लिए ईरान से तेल खरीद पाना असंभव हो गया है. ऐसे में अगर पाकिस्तान मध्यस्थ बनकर संघर्ष रोकने में कोई पहल कर सकता है, तो संभव है कि अमेरिका आगे चलकर उसे थोड़ी सी राहत दे और पाकिस्तान ईरान से तेल खरीद सके. दूसरा पक्ष ईरान भी है, तो संभवतः अमेरिका से छूट लेने के बाद पाकिस्तान सस्ते दामों पर भी तेल खरीद सकेगा.

आर्थिक रूप से पाकिस्तान गहरे संकट का सामना कर रहा है. अप्रैल के आखिर तक पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात से लिया 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाना होगा. ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तीन देशों की यात्रा पर पहुंचे हैं, ताकि उनकी देश को कहीं से आर्थिक मदद मिल सके.
पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था बचाने के लिए खाड़ी देशों के सहारे की जरूरत है. होर्मुज संकट की वजह से आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए तेल और अधिक महंगा हो जाएगा. इसकी वजह से उसके ऊपर आर्थिक दबाव और बढ़ेगा. ऐसे में इस मध्यस्थता की एक वजह सस्ता या उधार पर तेल लेना हो सकता है.
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ईरान-अमेरिका वार्ता फेल होने के बाद इसका असर शिपिंग रूट्स पर भी होगा, जिसका खर्च वहन करना अमेरिका के लिए मुश्किल होगा. होर्मुज अगर बंद होता है, तो पाकिस्तान की ऊर्जा सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित होगी. वर्तमान समय में भी पाकिस्तान में महंगाई चरमसीमा पर पहुंची हुई है, ऐसे में संघर्ष और बढ़ने पर इसका दुगना असर देखने को मिलेगा.
शहबाज शरीफ के इस दौरे पर सऊदी अरब और कतर से अरबों डॉलर की मदद मिलने की उम्मीद है. एक तरफ पाकिस्तान ईरान के साथ बातचीत में शामिल हो रहा है और अमेरिका का मैसेज वहां तक पहुंचा रहा है; दूसरी तरफ खाड़ी देशों के सामने मदद के लिए हाथ फैला रहा है.
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बता दें, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने पश्चिम एशिया के देशों में इजरायल और अमेरिका की संपत्तियों को निशाना बनाया. ईरान इन हमलों में खाड़ी देशों को भी आर्थिक नुकसान हुआ है. ऐसे में अगर ईरान और अमेरिका के बीच बात नहीं बनती है और संघर्ष और भड़कता है, तो पाकिस्तान की दोहरी नीति उस पर भारी भी पड़ सकती है.
