आठ वर्ष पहले चारबाग के होटल एसएसजे और विराट में आग लगने से सात लोगों की मौत हुई थी। वहीं, चार वर्ष पहले मदन मोहन मालवीय मार्ग पर बने होटल लेवाना सुइट्स में लगी आग चार जिंदगियां निगल गई थी। इन मामलों में उस समय आरोपियों की लंबी लिस्टें बनीं, पर हुआ कुछ नहीं। हादसे के बाद एक्शन की आग भी ठंडी पड़ गई।
अग्निकांड के बड़े जिम्मेदारों को बरी कर दिया गया। कुछ की पेंशन में मामूली कटौती की गई। कुछ को डिमोट किया गया। कुल मिलाकर जांच के नाम पर दिखावा हुआ। 11 मौतों के बाद भी कार्रवाई को सस्ते में निपटा दिया गया। अलीगंज अग्निकांड की जांच का आने वाले समय में ऐसा ही हश्र हो तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।
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19 जून 2018 को चारबाग के होटल एचएसजे में आग लगी, जिसने पड़ोस के होटल विराट को भी चपेट में लिया। अग्निकांड से शासन तक हड़कंप मच गया था। जांच में दोनों होटल मानकों के विपरीत अवैध पाए गए। एलडीए ने दो पीसीएस अफसरों और इंजीनियरों सहित 22 लोगों को आरोपी बनाकर कार्रवाई के लिए शासन में रिपोर्ट भेजी। इसके बाद शासन ने जांच कराई, जो कई वर्ष तक चली।
लंबी पड़ताल के बाद जो रिपोर्ट सामने आई उसमें पीसीएस अधिकारी राकेश कुमार मिश्र को बिना किसी दंड के बरी कर दिया गया। वे उस समय एलडीए में संयुक्त सचिव थे। इसी तरह पीसीएस अफसर बिरेंद्र कुमार पांडेय को भी बरी कर दिया गया है। वे भी उस समय एलडीए में संयुक्त सचिव के पद पर थे।
लेवाना अग्निकांड के आठ आरोपियों में से चार बरी
एलडीए ने होटल लेवाना सुइट्स अग्निकांड में आठ आरोपी बनाए थे। इन पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी गई। जांच के बाद शासन ने चार आरोपियों को बरी कर दिया। जिन चार पर कार्रवाई हुई, उनमें से दो का डिमोशन किया गया और एक की पेंशन में कटौती की गई। चौथा आरोपी निलंबित किया गया, जो बाद में बहाल होकर तैनाती पा चुका है। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार का कहना है कि दोनों अग्निकांडों के आरोपियों की रिपोर्ट उस समय एलडीए की ओर से शासन को भेजी गई थी। शासन की ओर से ही कार्रवाई की गई है। जो दोषी थे, उन्हें दंड दिया गया है। एलडीए ने इस पर अमल किया।


