मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब कानून के रखवालों में ही अपराधियों का खौफ खत्म होता नजर आ रहा है। शाहपुरा इलाके में चेकिंग के दौरान दो बदमाशों ने पुलिस की साख को तार-तार करते हुए शाहपुरा थाने के आरक्षक सुंदरराम पटेल को अगवा कर लिया। बदमाशों ने आरक्षक के हाथ-पैर और मुंह बांधकर उसे कार में पटक दिया और रातभर शहर में घुमा-घुमाकर बेरहमी से पीटते रहे। तड़के पुलिस तंत्र के सक्रिय होने पर आरोपी आरक्षक को एमपी नगर स्थित शासकीय मुद्रणालय के पास फेंककर फरार हो गए।
पुलिस ने संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की
सनसनीखेज वारदात से भी ज्यादा हैरान करने वाला रवैया पुलिस के आला अधिकारियों का रहा। महकमे की इतनी बड़ी नाकामी और पुलिस की फजीहत को छिपाने के लिए आला अफसरों ने मामले पर पर्दा डालने की पूरी कोशिश की। चर्चा है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने मातहत कर्मचारियों को बाकायदा उनके परिजनों की कसम दिलाकर हिदायत दी कि यह खबर किसी भी कीमत पर जनता के बीच नहीं पहुंचनी चाहिए।बदमाश विदिशा जिले के गंजबासौदा के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस ने संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
वायरलेस सेट से अलर्ट सुनकर की मारपीट
अपहरण का घटनाक्रम 7-8 अगस्त की दरमियानी देर रात का है। आरक्षक सुंदरराम पटेल अपने साथी के साथ गश्त पर थे। संदेह होने पर उन्होंने एक कार को रोका और आरोपियों को थाने चलने को कहा। साथी आरक्षक बाइक लेकर आगे निकल गया, जबकि सुंदरराम पटेल कार में सवार हो गए। मौका मिलते ही बदमाशों ने आरक्षक को दबोच लिया। उसका मोबाइल छीनकर स्विच ऑफ कर दिया और हाथ-पैर बांधकर पिटाई शुरू कर दी। जब आरक्षक सुंदरराम थाने नहीं पहुंचा, तब साथी पुलिसकर्मियों ने फोन लगाया। फोन स्विच ऑफ होने के बाद कंट्रोल रूम के जरिए पूरे भोपाल में अलर्ट जारी किया गया। आरक्षक के पास मौजूद वायरलेस सेट पर जैसे ही चेकिंग और नाकाबंदी के मैसेज गूंजने लगे, बौखलाए बदमाशों ने उसके साथ दोबारा मारपीट की। अंततः तड़के आरोपी आरक्षक को सड़क किनारे फेंककर उसका मोबाइल लूटकर भाग निकले।
वकील की कार से वारदात, पुलिस पर उठे सवाल
सीसीटीवी कैमरों और कार के नंबर के आधार पर पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। एक बदमाश विदिशा जिले के गंजबासौदा का है, जबकि दूसरा भोपाल में ही रहता है। जिस कार का इस्तेमाल वारदात में हुआ, वह एक वकील के नाम पर रजिस्टर्ड बताई जा रही है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि कार चोरी की थी या नहीं। आरोपियों के खिलाफ अपहरण और लूट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
हालांकि, इस घटना ने भोपाल पुलिस की मुस्तैदी और इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां आम जनता की सुरक्षा करने वाली पुलिस खुद अपने ही कर्मचारियों की सुरक्षा करने में नाकाम साबित हो रही है, वहीं मामले को दबाने के लिए कसम दिलाए जाने के आरोपों ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

