कई बार खेल सिर्फ जीत का नाम नहीं होता, बल्कि आखिरी कोशिश तक हार न मानने का दूसरा नाम होता है। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह ने यही जज्बा दिखाया। क्लीन एंड जर्क में लगातार दो प्रयास असफल रहे, सोने का सपना हाथ से फिसल गया, लेकिन चेहरे पर निराशा से ज्यादा संतोष था। वजह थी- भारत की झोली में राष्ट्रमंडल खेलों का दूसरा पदक आ चुका था। पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में ऋषिकांता ने रजत पदक जीतकर एक बार फिर साबित किया कि बड़े खिलाड़ी वही होते हैं, जो दबाव में भी देश का सिर ऊंचा कर दें।

