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Us-iran War:वेंस-रूबियो थे खिलाफ, सिर्फ यह एक मंत्री साथ; फिर क्यों जंग को तैयार हुए ट्रंप, इनसाइड स्टोरी – Us Iran War Inside Story Israel Pm Benjamin Netanyahu Us President Donald Trump Conflict Plan Jd Vance Rubio

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यह सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं है। यह वो वाकया है, जिसकी वजह से अमेरिका-इस्राइल ने ईरान पर युद्ध का फैसला किया। व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में वे लोग बैठे थे, जो जानते थे कि यह युद्ध खतरनाक है, फिर भी उनकी बात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुलकर विरोध किया, लेकिन उनके विरोध को नजरअंदाज कर दिया गया। एक जनरल था, जो हर जोखिम गिनाता रहा, लेकिन सीधे इनकार नहीं कर सके। इस सब के बीच एक प्रधानमंत्री थे, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। उन्होंने एक घंटे में ट्रंप को वह यकीन दिला दिया, जो अमेरिका के अपने खुफिया तंत्र ने अब तक उन्हें नहीं दिलाया था। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक आगामी किताब के लिए की गई रिपोर्टिंग पर आधारित एक खबर प्रकाशित की है। यह खबर बताती है कि ईरान पर हमले का फैसला आखिर किस तरह लिया गया। सिलसिलेवार तरीके से जानिए…


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11 फरवरी को व्हाइट हाउस में क्या हुआ?

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू व्हाइट हाउस पहुंचे। वे महीनों से अमेरिका को ईरान पर एक बड़े संयुक्त हमले के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे थे। यह उनके लंबे राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा दांव था। पहले कैबिनेट रूम में बैठक हुई, जो ओवल ऑफिस से सटा है। यहां नेतन्याहू ने ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की वजह से इस्राइल के वजूद को लेकर पैदा हुए खतरे पर ध्यान केंद्रित कराया। जब कमरे में किसी ने ऑपरेशन के संभावित जोखिमों के बारे में पूछा, तो नेतन्याहू ने उन्हें स्वीकार किया, लेकिन उनका केंद्रीय तर्क एक ही था। उनकी नजर में निष्क्रियता के जोखिम, कार्रवाई के जोखिमों से कहीं बड़े हैं। अगर वे देरी करें तो ईरान को अपना मिसाइल उत्पादन बढ़ाने और अपने परमाणु कार्यक्रम के चारों ओर सुरक्षा कवच बनाने का समय मिल जाएगा। उस बैठक में मौजूद सभी जानते थे कि ईरान महंगे अमेरिकी इंटरसेप्टरों की तुलना में कहीं कम लागत और कहीं तेजी से अपने मिसाइल और ड्रोन भंडार बढ़ा सकता है।


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