टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की नासिक यूनिट में सामने आए यौन उत्पीड़न और जबरन धार्मिक धर्मांतरण के मामले में एक नया मोड़ आया है। इस प्रकरण के आरोपियों में शामिल निदा खान फिलहाल फरार है, लेकिन उसके परिवार की ओर से दावा किया गया है कि वह मुंबई में है। साथ ही, परिवार वालों ने यह भी दावा किया है कि निदा खान गर्भवती है और अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रही है।
निदा खान ने नाशिक की एक स्थानीय अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी है। माना जा रहा है कि वह अपनी मेडिकल स्थिति को आधार बनाकर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) निदा की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे आधिकारिक मेडिकल चैनलों के माध्यम से निदा के इन दावों की पुष्टि करेंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया इसे गंभीर साजिश
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले पर शुक्रवार को कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नासिक टीसीएस यूनिट में यौन उत्पीड़न और धार्मिक उत्पीड़न के जो आरोप लगे हैं, वे अत्यंत गंभीर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिलते हैं कि ये गतिविधियां एक सुनियोजित ‘मॉड्यूल’ के तहत की जा रही थीं। उन्होंने टीसीएस प्रबंधन की सराहना की कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और आरोपियों का बचाव नहीं कर रहे हैं।
फडणवीस ने यह भी जानकारी दी कि इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी सूचित कर दिया गया है। नासिक पुलिस ने अब तक कुल नौ शिकायतों पर मामला दर्ज किया है। महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि साल 2022 से मार्च 2026 के दौरान उनके साथ यौन उत्पीड़न किया गया, उनका पीछा किया गया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पुलिस को जांच में धार्मिक उत्पीड़न का एक खास पैटर्न भी मिला है।

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क्या है पूरा मामला?
25 साल की निदा खान ने साल 2021 में नाशिक की टीसीएस बीपीओ यूनिट में काम शुरू किया था। नाशिक पुलिस इस समय ऑफिस में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़ी नौ शिकायतों की जांच कर रही है। पुलिस ने अब तक सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें छह पुरुष और एक महिला एचआर हेड शामिल हैं।
महिला कर्मचारियों के गंभीर आरोप
पुलिस की एसआईटी ने बताया कि आठ महिला कर्मचारियों ने वरिष्ठ सहयोगियों पर मानसिक और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्होंने कंपनी के एचआर विभाग से शिकायत की थी, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। यह पूरा विवाद फरवरी 2022 से मार्च 2024 के बीच का बताया जा रहा है।
एक आरोपी पर आरोप है कि उसने शादी का झांसा देकर एक महिला कर्मचारी के साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके अलावा, महिला कर्मियों के साथ छेड़छाड़ और उनके निजी जीवन पर भद्दे कमेंट्स करने के भी आरोप हैं। जब शिकायत कंपनी के बड़े अधिकारियों तक पहुंची, तो उन्होंने कोई कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों का साथ दिया। पुलिस ने अपने बयान में बताया कि आरोपियों पर सिर्फ महिलाओं के उत्पीड़न का ही मामला नहीं है। उन्होंने एक पुरुष कर्मचारी को जबरन नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया। इतना ही नहीं, उस कर्मचारी के धर्म का अपमान भी किया गया। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
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टीसीएस और टाटा संस ने क्या कहा?
टीसीएस ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि उनकी कंपनी में उत्पीड़न के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इन आरोपों को बेहद दुखद और चिंताजनक बताया है। उन्होंने घोषणा की कि टीसीएस की मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में आंतरिक जांच की जा रही है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि वे पुलिस के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।


