प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व लोकसभा महासचिव तथा देश के प्रख्यात संवैधानिक विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी. कश्यप के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डॉ. कश्यप भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे, जिनका संसदीय और संवैधानिक विमर्श में योगदान समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उनके लेखन हमेशा याद किए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
Pained by the passing of Dr. Subhash C. Kashyap, who previously served as Secretary General of the Lok Sabha. He was one of India’s foremost constitutional scholars whose contributions to parliamentary and constitutional discourse enriched our society. His writings and commitment…
— Narendra Modi (@narendramodi) June 4, 2026
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रक्षा मंत्री ने भी निधन पर जताया दुख
वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी डॉ. कश्यप के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें एक प्रतिष्ठित संवैधानिक विशेषज्ञ और विपुल लेखन करने वाले विद्वान बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. कश्यप ने संविधान, संसदीय लोकतंत्र, शासन व्यवस्था और भारत के संवैधानिक इतिहास पर अनेक पुस्तकें लिखीं, जिन्होंने जनचर्चा को समृद्ध किया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की समझ को गहरा किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि डॉ. कश्यप का लेखन आने वाली पीढ़ियों के लिए सीख और प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उन्होंने शोकाकुल परिवार, मित्रों और उनके असंख्य प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
Deeply saddened by the passing of Dr. Subhash C. Kashyap, former Secretary-General of the Lok Sabha and an eminent constitutional expert.
A prolific scholar who authored numerous books that illuminated the complexities of the Constitution and parliamentary democracy, he made an…
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) June 4, 2026
एक देश-एक चुनाव समिति का हिस्सा थे सुभाष कश्यप
10 मई 1929 को जन्मे डॉ. सुभाष कश्यप हाल के वर्षों में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति का भी हिस्सा रहे थे, जिसे देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए कानूनी ढांचे की तैयारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनका निधन भारतीय संसदीय लोकतंत्र, संवैधानिक विमर्श और सार्वजनिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। सुभाष कश्यप 1984 से 1990 तक सातवीं, आठवीं और नौवीं लोकसभा के महासचिव रहे। वह एक प्रख्यात राजनीतिक वैज्ञानिक, भारतीय संविधान, संवैधानिक कानून, संसदीय मामलों के विशेषज्ञ थे।


