देश में बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या के बसावट की जांच अब उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल से आगे बढ़कर जम्मू-कश्मीर तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से विदेशी फंडिंग के कथित मामले में दर्ज प्राथमिकी में जम्मू और श्रीनगर से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, हाल में पांच राज्यों में की गई कार्रवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील कठुआ, रियासी, राजोरी और पुंछ जिले से भी अहम कड़ियां सामने आई हैं।

यहां अवैध रूप से भारत पहुंचे घुसपैठियों के लिए फर्जी पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराने, सीमावर्ती क्षेत्रों में ठिकाना उपलब्ध कराने और आजीविका के साधन जुटाने का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय मिला है। एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क को विदेशी स्रोतों से धन मिला और क्या इसके कुछ वित्तीय लेन-देन का संबंध आतंकी फंडिंग से जुड़ा हो सकता है। इसी जांच के क्रम में मई में कठुआ से दो लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
पूछताछ के आधार पर उत्तराखंड से भी दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। जांच के ही क्रम में पता चला है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को पाकिस्तान से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में बसाने में भी मदद की गई है। जम्मू मुख्यालय में तो रोहिंग्या की बड़ी आबादी मिली है। हालांकि करीब 250 घुसपैठियों को कठुआ जिले के हीरानगर में बनाए गए डिटेंशन सेंटर में रखा गया है।
घुसपैठ के लिए नेपाल का आसान रास्ता
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बांग्लादेशी घुसपैठियों ने नेपाल का भी आसान रास्ता अपनाया। बांग्लादेश और नेपाल सीमा काकरभिट्टा से नेपाल में दाखिल होकर झापा, इटहरी, विराटनगर, जनकपुर होते हुए खुली सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुए।
संवेदनशील जिले
सबसे अधिक रोहिंग्या परिवारों की मौजूदगी जम्मू में मिली है। यहां भठिंडी, नरवाल, सुंजवां, बाहु फोर्ट के आसपास की बस्तियां पहले भी चर्चा में रही हैं।
- कठुआ में फर्जी दस्तावेज और नेटवर्क की जांच अभी चल रही है। यहां जिला अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण संवेदनशील है।
- रियासी, राजोरी, पुंछ और उधमपुर के साथ ही कश्मीर संभाग के अनंतनाग और बारामूला बांग्लादेशी घुसपैठियों के मामले में संवेदनशील बना हुआ है।
इस तरह पहुंचे जम्मू-कश्मीर
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बांग्लादेशी घुसपैठिए पेट्रापोल स्थित पश्चिम बंगाल सीमा से 24 परगना, कोलकाता, दुर्गापुर के रास्ते झारखंड, बिहार, वाराणसी, कानपुर पहुंचे हैं।
- यहां से आगरा व दिल्ली दो हिस्सो में बंटे। दिल्ली के बाद इन्होंने हरियाणा के सोनीपत वहां से अंबाला और फिर पठानकोट का रुख किया।
- कठुआ जिले के लखनपुर से होकर जम्मू-कश्मीर में दाखिल हुए, जहां से उन्हें पाकिस्तान से लगती सीमा से सटे क्षेत्रों में बसाने का क्रम शुरू हुआ।
संगठित नेटवर्क कर रहा काम
यह बड़े और संगठित तरीके से चलाया जा रहा नेटवर्क है। देश के कई हिस्सों में इस तरह की कोशिशें सामने आ रही हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर, विशेषकर जम्मू संभाग पर जोर दिया गया है। यहां जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) बदलाव लाने की मंशा से लंबे समय से प्रयास किए जाने की आशंका रही है। अब जांच एजेंसियां इन गतिविधियों और उनसे जुड़े नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं।गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 के तहत धार्मिक गतिविधियों के लिए विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और सख्त किया है। इससे ऐसे मामलों पर काफी हद तक अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। पहचान और दस्तावेज के सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत करना होगा, ताकि घुसपैठ और फर्जी पहचान के नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
-एसपी वैद्य, पूर्व डीजीपी, जम्मू-कश्मीर
