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Saudi Nuclear Deal:सऊदी अरब के परमाणु समझौते में हुई इस्राइल की एंट्री, ट्रंप ने कौन सी नई शर्तें रख दीं? – What New Conditions Has Trump Set, And Will Saudi Arabia Get The Full Benefits Of Nuclear Deal:

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अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए परमाणु समझौते को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल ऊर्जा और अन्य असैन्य जरूरतों के लिए है, लेकिन इसकी एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि सऊदी अरब को अब्राहम समझौते के तहत इस्राइल के साथ अपने संबंध सामान्य करने होंगे। ट्रंप ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दी। यह शर्त उस समय सार्वजनिक नहीं की गई थी, जब अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने समझौते की घोषणा की थी।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि इस समझौते के तहत किसी भी प्रकार का यूरेनियम संवर्धन नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौता केवल गैर-सैन्य उपयोग से जुड़ा है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह पूरा समझौता इस बात पर निर्भर करेगा कि सऊदी अरब अब्राहम समझौते में शामिल होकर इस्राइल के साथ अपने संबंध सामान्य करे। अब्राहम समझौता ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ था। इसके तहत संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सूडान और मोरक्को जैसे मुस्लिम बहुल देशों ने इस्राइल के साथ संबंध सामान्य किए थे।

परमाणु समझौते की मुख्य शर्तें क्या हैं?


  • अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने समझौते की घोषणा के समय इस्राइल के साथ संबंध सामान्य करने की शर्त का उल्लेख नहीं किया था।

  • घोषणा में यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पर रोक से जुड़ी किसी शर्त का भी जिक्र नहीं किया गया।

  • समझौते का पूरा दस्तावेज अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

  • ट्रंप प्रशासन ने भी समझौते की विस्तृत शर्तें सार्वजनिक नहीं की हैं।

  • समझौते पर अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने हस्ताक्षर किए हैं।

  • समझौते को अभी अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी मिलनी बाकी है।

  • अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार यह समझौता कई दशकों तक चलने वाली अरबों डॉलर की साझेदारी की कानूनी नींव रखेगा।

  • विभाग ने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य परमाणु प्रसार रोकना और अमेरिका तथा सऊदी अरब के कई आर्थिक एवं रणनीतिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है।

 

सऊदी अरब और फलस्तीन का क्या रुख रहा है?

इससे पहले अमेरिका की ओर से सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देने वाले किसी भी समझौते के लिए इस्राइल के साथ संबंध सामान्य करना जरूरी माना जाता रहा है। लेकिन सऊदी नेतृत्व लंबे समय से कहता आया है कि जब तक फलस्तीनी राज्य की दिशा में ठोस और सार्थक प्रगति नहीं होती, तब तक इस्राइल के साथ संबंध सामान्य करना संभव नहीं होगा। ऐसे में ट्रंप की नई शर्त दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत को प्रभावित कर सकती है।

समझौते को लेकर क्या चिंताएं सामने आई हैं?

इस समझौते के सामने आने के बाद पश्चिम एशिया में परमाणु प्रसार को लेकर चिंताएं भी जताई गई हैं। जानकारी के अनुसार, इस समझौते में संयुक्त राष्ट्र के सबसे कड़े निरीक्षण मानकों को लागू करने या यूरेनियम संवर्धन और इस्तेमाल किए गए परमाणु ईंधन के पुनर्प्रसंस्करण पर पूर्ण प्रतिबंध जैसी शर्तें शामिल होने की उम्मीद नहीं थी। समझौते से परिचित लोगों के अनुसार, संयुक्त अध्ययन के बाद यदि इसे व्यवहारिक माना जाता है तो अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन सुविधा बनाने की अनुमति भी मिल सकती है। इससे पहले ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप इस समझौते को मंजूरी दे चुके हैं।

 

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