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Rss:’बात वहां के लोगों की थी, देश की नहीं’; पाकिस्तान से संवाद पर आरआरएस प्रमुख भागवत ने किया होसबाले का बचाव – Bhagwat Clarifies Rss Stand On Pakistan Dialogue, Says Remarks Were About People, Not The State

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने को लेकर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले की हालिया टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा कि उनका आशय पाकिस्तान के आम लोगों से था, न कि वहां की सरकार या राज्य व्यवस्था से। आरएसएस के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि पाकिस्तान के संबंध में संघ का कोई अलग विदेश नीति दृष्टिकोण नहीं है और वह इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीति का ही अनुसरण करता है।

पाकिस्तान में भी हैं भारत के पक्ष में सोचने वाले लोग

भागवत ने कहा कि पाकिस्तान में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं जो मानते हैं कि भारत का विभाजन एक ऐतिहासिक भूल थी। उन्होंने दावा किया कि पड़ोसी देश के कुछ पत्रकार और बुद्धिजीवी भी संघ के कार्यों की सराहना करते हैं और दो-राष्ट्र सिद्धांत के विरोध में अपनी राय रखते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में एक ऐसा वर्ग भी है जो मानता है कि दोनों देशों का साथ रहना अधिक बेहतर विकल्प होता। ऐसे लोगों को ध्यान में रखते हुए संवाद की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।

‘अन्याय का विरोध, लेकिन अच्छाई का संरक्षण भी जरूरी’

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यदि भविष्य में परिस्थितियां बदलती हैं, तो पाकिस्तान के लोगों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखने की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष का उद्देश्य केवल विरोधी को परास्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में मौजूद सकारात्मक तत्वों को भी संरक्षित रखना जरूरी है। भागवत ने कहा कि भारत की संस्कृति और सोच प्रतिशोध की नहीं है। उन्होंने कहा “हम अन्याय और अत्याचार का विरोध करते हैं, लेकिन जो अच्छा है उसे बचाने की भी कोशिश करते हैं। यही हमारी परंपरा और स्वभाव है।”

होसबाले के बयान पर उठे थे सवाल

दरअसल, मई में दिए गए एक साक्षात्कार में दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि देश की सुरक्षा और स्वाभिमान सर्वोपरि हैं और इसकी जिम्मेदारी सरकार की है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि संवाद के सभी रास्ते बंद नहीं किए जाने चाहिए और बातचीत की संभावना हमेशा बनी रहनी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया था जब भारत-पाकिस्तान संबंध और सीमा पार आतंकवाद को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इसी संदर्भ में भागवत से संघ की आधिकारिक राय के बारे में सवाल पूछा गया था।

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