
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आज 32वें दिन भी भारी विद्रोह जारी रहा है. हर तरफ चर्चा का केंद्र 15 जुलाई को पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद में प्रदर्शनकारियों का मार्च और कब्जा रहा. 15 जुलाई को 1 लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारियों ने मुजफ्फराबाद मार्च को लेकर पाकिस्तान के गृह मंत्रालय को 8 जुलाई को चिट्ठी लिखी थी. इसमें पीओके में पैरामिलिट्री फ़ोर्स फ्रंटियर कोर के 4 हजार जवानों की अतिरिक्त टुकड़ी और पाकिस्तानी रेंजर्स की 7 अतिरिक्त विंग्स यानी 5 हजार 500 जवानों की अतिरिक्त टुकड़ी तैनात करने की मांग की गई थी. जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने शुक्रवार (8 जुलाई) ये तैनाती मंज़ूर कर दी है.
पीओके के रावलाकोट में जहां पहले से 90 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी ईदगाह मैदान और बस स्टैंड पर बैठे हैं. वहां 4 जून से ही पाकिस्तानी रेंजर्स के 8 हजार जवान तैनात हैं. ऐसे में पीओके में 15 जून के मार्च से पहले पाकिस्तानी पैरामिलिट्री के तैनात जवानों की संख्या 17 हजार 500 से ज्यादा हो गई है. वहीं ये 9 हजार 500 के अतिरिक्त बल की तैनाती मुजफ्फराबाद और मीरपुर में की कल शाम तक की जाएगी. इसके अलावा आज 32 वे दिन पीओके में जम कर पाकिस्तानी सेना और हुकूमत के खिलाफ मोर्चा निकाला गया, जिसमें आज भी छोटे छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे.
प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक सरदार उमर नज़ीर ने आज मंच से पीओके के सभी लोगों से अपील की सभी लोग जो बीमार नहीं हैं वो 15 जुलाई की मुजफ्फराबाद मार्च में शामिल हो और पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ़ होने वाले प्रदर्शन में हिस्सा लें. इसी तरह अवामी एक्शन कमेटी के सदस्य सरदार जावेद इकबाल ने कहा कि अगर 15 जुलाई की मार्च में हम मारे भी गए तो कोई बात नहीं लेकिन 15 जुलाई की मार्च पीओके की तारीख का अहम हिस्सा है और सभी को इसमें शामिल होना है.
इसी तरह प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक सरदार अमान खान ने 15 जुलाई की मार्च का खाका पेश करते हुए मंच से कहा कि पीओके को पाकिस्तान की सरकार आतंकी इलाका बनाना चाहती है, जहां पर कभी दो समुदाय आपस में नहीं लड़े, लेकिन अब पीओके की कुर्सी पर बैठे सभी चोरों को 15 जुलाई की मार्च के बाद हटाना है. पीओके के रावलकोट में कल पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी में 2 लोगो के मारे जाने की पुष्टि हुई थी.
आज दोपहर में मारे गए एक और युवक ने दम तोड़ दिया जिसके बाद पीओके में पिछले 32 दिनों में मरने वालो का आकड़ा 62 हो गया है. कल हुई गोलीबारी की आज कुछ तस्वीरें भी सामने आई जहां पर देखा जा सकता है कि कैसे पाकिस्तानी रेंजर्स प्रदर्शनकारियों पर शेलिंग कर रहे हैं और शेलिंग के बाद पाकिस्तानी रेंजर्स की दागी गई गोलियां लोग एक साथ इकट्ठा करके दिखा रहे हैं.
पीओके में 32 दिनों में 8 बार गोलीबारी की गई जिसमें 200 से ज्यादा लोग घायल हैं. प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक सरदार उमर नजीर ने आज बताया की पिछले 32 दिनों से किसी भी घायल का इलाज पीओके के अस्पतालों में नहीं हो रहा है. साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में दवाओं की कमी है क्योंकि पाकिस्तानी हुकूमत ने बॉर्डर सील कर रखे हैं और किसी को भी दवा और खाने का सामान पिछले 1 महीने से नहीं लाने दिया जा रहा है.
पीओके में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ विद्रोह में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) भी पूरी तरफ से शामिल हो गया है जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने भारत के खिलाफ 50 साल पहले खड़ा किया था और आज भी पाल पोस रही है उसी JKLF के पीओके में प्रमुख सरदार अरबाब ने कहा की पाकसीतानी सेना को लगता है की हमे इधर से मारो और उधर से मारो हम चले जाएंगे लेकिन ना ये जुल्म हमे पहले मंज़ूर था और ना ही आज मंज़ूर है.

