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Mp News:भोजशाला में गूंजे पूजा-पाठ और हनुमान चालीसा के स्वर, हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहली बार हुई आराधना – Dhar Bhojshala Saraswati Temple High Court Verdict First Puja News

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मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किए जाने के बाद शनिवार को यहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला-कमाल मौला विवाद पर फैसला सुनाए जाने के बाद हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है। फैसले के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा की।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहली बार हुई पूजा

शनिवार सुबह भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों के साथ श्रद्धालु भोजशाला परिसर में एकत्र हुए। यहां पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला परिसर में यह पहली पूजा मानी जा रही है।

भोजशाला परिसर में पूजा के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना मंदिर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किया और हिंदू पक्ष को वहां पूजा करने का अधिकार दिया। अदालत ने उन याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया, जिनमें भोजशाला परिसर हिंदुओं को सौंपने और परिसर में मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने से रोकने की मांग की गई थी।

शुक्रवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।

ये भी पढ़ें- Bhojshala Case Live: हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार; मुस्लिम पक्ष जा सकता है सुप्रीम कोर्ट; धार में जश्न

कोर्ट ने कहा – भोजशाला का धार्मिक स्वरूप मंदिर का

अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि भोजशाला परिसर और कमाल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र एक संरक्षित स्मारक है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप भोजशाला का है, जहां देवी सरस्वती का मंदिर स्थित है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी माना कि ऐतिहासिक साहित्य और उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित होता है कि यह स्थान देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर था। साथ ही यह जगह प्राचीन समय में संस्कृत शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में भी जानी जाती थी।

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