शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को जमानत मिलने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि वे निडर हैं और कुछ छिपाना नहीं चाहते हैं, बस ईडी को झेलना है। उन्होंने कहा कि झेलने की क्षमता है, वह सबसे बड़ी चीज है।
रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, “मुझे इस देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। मुझे पता है कि ईडी को सरकार चला रही है और ईडी सरकार के इशारों पर ही काम करती रहेगी। मुझे देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। मैं हमेशा यहीं रहूंगा और सभी सवालों के जवाब दूंगा। मैं निडर हूं और मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।”
शनिवार को रॉबर्ट वाड्रा शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए, जहां उन्हें कोर्ट से 50,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी गई। राउज एवेन्यू कोर्ट में वाड्रा के वकील ने अपनी दलील में कहा कि इस मामले में उन्हें पहले कभी गिरफ्तार नहीं किया गया था, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। अदालत ने उनकी दलील सुनने के बाद जमानत मंजूर कर ली। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।
दरअसल, यह पूरा मामला साल 2008 का है, जब गुरुग्राम के शिकोहपुर इलाके में करीब 3.53 एकड़ जमीन का सौदा हुआ था। ईडी का आरोप है कि इस जमीन खरीद-फरोख्त में मनी लॉन्ड्रिंग और गड़बड़ियां हुईं। जांच एजेंसी के मुताबिक, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने फरवरी 2008 में यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड से करीब 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।
ईडी का कहना है कि इस सौदे में कई तरह की अनियमितताएं हुईं। एजेंसी के अनुसार, कंपनी के पास उस समय इतनी पूंजी नहीं थी, फिर भी जमीन खरीदी गई। इतना ही नहीं, आरोप है कि इस डील में असली भुगतान नहीं किया गया और सेल डीड में गलत जानकारी दी गई। यहां तक कि एक ऐसे चेक का जिक्र भी किया गया जो कभी जारी ही नहीं हुआ या कैश नहीं हुआ।
जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि जमीन की कीमत को जानबूझकर कम दिखाया गया, जिससे स्टाम्प ड्यूटी की चोरी की जा सके। ईडी ने इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 423 के तहत अपराध बताया है। अपनी शिकायत में ईडी ने कहा कि इस पूरे मामले में करीब 58 करोड़ रुपये की अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) सामने आई है।

