इंडिया गठबंधन की बैठक शुरू होने से पहले का एक दृश्य राजनीतिक घटनाक्रम पर भारी पड़ गया। बैठक स्थल पर तय समय से कुछ मिनट पहले पहुंचीं कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का जिस आत्मीयता और गर्मजोशी के साथ स्वागत किया, उसने विपक्षी राजनीति में बदलते समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। ममता के पहुंचते ही सोनिया ने उन्हें गले लगाया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच करीब दस मिनट तक बातचीत हुई। बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार, दोनों के बीच हुई सहज और आत्मीय बातचीत केवल औपचारिक शिष्टाचार भर नहीं थी।

विपक्षी राजनीति में उभर रहे नए समीकरण
इसे विपक्षी राजनीति में उभर रहे नए समीकरणों और बदलते रिश्तों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसकी वजह यह है कि पिछले कुछ समय से विपक्षी खेमे में ममता की भूमिका को लेकर नई चर्चा चल रही है। गठबंधन की बैठक में भी ममता सबसे सक्रिय नेताओं में शामिल रहीं और उन्होंने अपने संबोधन में बार-बार पुरानी बातों और मतभेदों को भुलाकर आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। सूत्रों का कहना है कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी मोर्चे को मजबूत करने की कवायद के बीच कई दल ममता को राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका में देखने के पक्षधर दिखाई दे रहे हैं।
कांग्रेस का बदला रुख
बैठक में मौजूद रहे कई नेताओं ने इस बार कांग्रेस के रवैये में आए बदलाव का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, कांग्रेस ने बैठक की तैयारियों के दौरान छोटे और क्षेत्रीय दलों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा। केवल निमंत्रण भेजने तक सीमित रहने के बजाय सहयोगी दलों की भागीदारी और सुझावों को महत्व देने का प्रयास किया गया। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस में भी अब यह समझ मजबूत हो रही है कि भाजपा के खिलाफ लड़ाई में क्षेत्रीय दलों को अधिक सम्मान और राजनीतिक स्थान दिए बिना व्यापक विपक्षी एकता संभव नहीं है।
बैठक में राहुल गांधी का रुख भी चर्चा का विषय बना। सूत्रों के अनुसार, राहुल ने ममता को विशेष महत्व का नेता बताया। संकेत दिया कि बंगाल की राजनीति में ममता की भूमिका और जनाधार को देखते हुए विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह संदेश विपक्षी राजनीति की नई रणनीति का भी हिस्सा है। कांग्रेस नेतृत्व यह संकेत देता दिखाई दिया कि क्षेत्रीय दलों के महत्व को वह पहले की तुलना में अधिक स्वीकार करने को तैयार है।
सकारात्मक रही बातचीत
बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार, इस बार बातचीत कहीं अधिक सकारात्मक और सहयोगात्मक रही। भाकपा सहित कई दलों के नेताओं ने माना कि प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी। इससे विपक्षी एकता को नई ऊर्जा मिली है।
