
ईरान और अमेरिका जहां एक तरफ पाकिस्तानी की संदेशवाहक नीति के तहत दूसरे दौर की बातचीत के लिए मेज पर आने के संकेत दे रहे हैं तो दूसरी तरफ 28 फ़रवरी को इजरायल-अमेरिका के हमले के बाद ईरान में सड़कों पर सरकार के समर्थन और अमेरिका-इजरायल के विरोध में प्रदर्शन 49वें दिन भी जारी रहा.
दर्जनों शहरों में प्रदर्शन
इस बार प्रदर्शन एक दो शहर नहीं बल्कि दर्जनों शहरों में हुआ. राजधानी तेहरान से लेकर पश्चिमी शहर उर्मिया, लोरिस्तान, खेरमानशाह, चलदारान, सल्मास, इलम, इश्फ़ान, खुरम्माबाद में आधी रात को लोग ईरानी झंडों के साथ सड़कों पर उतरे और प्रदर्शन किया. सबसे दिलचस्प तस्वीर दिखी लोरिस्तान की, जहां हाथ में बंदूक लेकर महिलाएं ईरानी सेना के समर्थन में बयान देती हुई और रैली को संबोधित करती हुई दिख रही हैं.
हाथ में गन ली हुई महिला ने कहा कि आज हम सब कफन पहनकर मैदान में आए हैं ताकि यह कह सकें कि मरियम की नस्ल ज़िंदा है और इस इस्लामी क्रांति के लिए अपनी जान देने को तैयार है. इसी तरह तेहरान के इंक़लाब स्क्वायर पर आधी रात को जनता इकट्ठा हुई और नारे लगाये कि कमांडर आप हमें आदेश दीजिए, हम आपके हर आदेश का पालन करेंगे.
सेना का बैंड भी मौजूद
ईरान के इस्फान और इलम शहर में हज़ारों लोग ईरानी झंडे के साथ सड़कों पर उतरे तो खुरम्माबाद में सड़क पर नमाज पढ़ी गई. ईरान के चालदरान शहर में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, जहां अयातुल्लाह अली की मौत के बदले की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया गया. सल्मास शहर में IRGC और सेना के अधिकारी सड़क पर लोगों के साथ रहे और सेना के बैंड ने लोगों का उत्साह बढ़ाने के लिए धुन बजाई.
ट्रंप के अमेरिकी नेवल ब्लाकेड को जारी रखने के बयान के बाद तेहरान के मेयर रीज़ा ज़कानी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि बातचीत की मेज़ को सिर्फ बातचीत का ज़रिया नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान का विस्तार माना जाना चाहिए था. साथ ही इस्लामी क्रांति के नेता खामेनेई की सोच के मुताबिक कोई भी बड़ा फैसला उनकी मंजूरी और तय दिशा के बिना नहीं होना चाहिए.
क्या बोले तेहरान के मेयर?
तेहरान के मेयर ने आगे कहा कि ट्रंप की धमकियों और दबाव के आगे झुकने के बजाय भरोसा एक बहादुर और सक्रिय जनता और जनता की ताकत पर होना चाहिए. साथ ही सबसे अहम बात अगर अमेरिका की तरफ से ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी का दावा सही है तो इसका मतलब साफ है युद्धविराम टूट चुका है. हम युद्ध की हालत में हैं और इसका जवाब भी उसी स्तर पर दिया जाना चाहिए.
ऐसे में देखना होगा कि ईरान की सरकार ट्रम्प की नाकेबंदी जारी रखने की घोषणा के बाद क्या इस्लामाबाद में अगले चरण की बातचीत के लिये जाती है या फिर कोई नई शर्त पाकिस्तान के ज़रिए अमेरिका को बताती है.
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