
मिडिल ईस्ट में सीजफायर के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिका अब उन देशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की सोच रहा है, जिन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध में उसका साथ नहीं दिया. पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस ने NATO देशों की एक तरह की अच्छे और बुरे की लिस्ट तैयार की है. इस लिस्ट में देशों को उनके डिफेंस खर्च और अमेरिका को दिए गए सहयोग के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है.
लिस्ट को NATO के महासचिव मार्क रूट के वॉशिंगटन दौरे से पहले तैयार किया गया. इसमें यूरोप के कई देशों को उनके व्यवहार के आधार पर अलग-अलग टियर में रखा गया है. डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार यूरोपीय देशों की आलोचना कर चुके हैं. उनका कहना है कि कई सहयोगी देशों ने न तो ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ दिया और न ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने में मदद की. इस वजह से तेल की कीमतें बढ़ीं और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा
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NATO देशों को ट्रंप ने दी थी चेतावनी
युद्ध से पहले भी ट्रंप ने NATO देशों को चेतावनी दी थी कि अगर वे रक्षा खर्च और रणनीतिक सहयोग में अमेरिका की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते हैं तो उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ सकता है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी इस बारे में संकेत दिए थे. उन्होंने कहा था कि जो देश अमेरिका का साथ देंगे, जैसे इज़रायल, साउथ कोरिया, पोलैंड, जर्मनी और बाल्टिक उन्हें खास सहयोग मिलेगा. जो देश सहयोग नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.
पोलैंड और रोमानिया को कैसे मिलेगा फायदा?
पोलैंड और रोमानिया जैसे देशों को इस नीति से फायदा मिल सकता है क्योंकि उन्होंने अमेरिका का समर्थन किया है. हालांकि, स्पेन जैसे देशों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने NATO के खर्च को लेकर आपत्ति जताई और ईरान युद्ध की आलोचना की. फिलहाल अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका किस तरह की सजा या फायदा देगा, लेकिन इसमें सैनिकों की तैनाती, संयुक्त सैन्य अभ्यास और हथियारों की बिक्री जैसे फैसलों में बदलाव शामिल हो सकते हैं. एक यूरोपीय अधिकारी ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास सजा देने का कोई साफ तरीका नहीं दिख रहा और अगर सैनिक हटाए जाते हैं तो इससे अमेरिका को ही नुकसान हो सकता है.
व्हाइट हाउस ने नाटो के मामले में क्या कहा?
इस पूरे मामले पर व्हाइट हाउस ने भी अपनी बात रखी है. डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी एना केली ने कहा कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहा है, लेकिन ईरान युद्ध के दौरान कई देशों ने उसका साथ नहीं दिया. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इस स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं और अमेरिका इस बात को याद रखेगा. पेंटागन ने भी कहा है कि वह आगे उन देशों को प्राथमिकता देगा, जो सामूहिक सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. हालांकि कुछ पूर्व अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की नीति से यूरोप और अमेरिका के रिश्तों में और तनाव बढ़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया पहले से ही कई बड़े संकटों का सामना कर रही है.
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