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Interview:उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की चेतावनी- जम्मू-कश्मीर में नशे की नर्सरी से आतंक का जंगल नहीं बनने देंगे – Lg Manoj Sinha Warns – We Will Not Allow The Drug Nursery In Jammu And Kashmir To Become A Jungle Of Terror.

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हौसले जब कड़े और इरादे नेक हों, तो बदलाव दिखता है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का नेतृत्व इसी का प्रमाण है। एक तरफ उन्होंने ड्रग्स के सौदागरों के खिलाफ ‘महायुद्ध’ छेड़ रखा है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश को विकास और निवेश का नया केंद्र बनाने में जुटे हैं। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, विकास और सामाजिक बदलाव, तीनों मोर्चों पर एक साथ काम चल रहा है। युवाओं को नशे के अंधकार से निकालकर तरक्की के उजाले की ओर ले जाने के संकल्प पर केंद्रित मनोज सिन्हा ने अभिषेक राज से बात की…।

पाकिस्तान पोषित नार्को टेरर कैसे समाप्त होगा, आखिर 100 दिन के बाद होगा क्या? 

नशा मुक्ति अभियान में तरीके से समझने वालों का स्वागत है, जो बाज नहीं आ रहे उन्हें ठीक से समझाया भी जा रहा है। अभी तक के 50 दिनों में 856 तस्करों पर प्राथमिकी दर्ज हुई। 946 को गिरफ्तार किया गया। करीब 758 किलो हेरोइन जब्त की गई। 22,686 नशीली गोलियां बरामद हुईं।  56.35 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई। तस्करों के 57 भवनों को गिराया गया। 116 पासपोर्ट रद्द करने की संस्तुति की गई। फरार तस्करों के विरुद्ध लुकआउट नोटिस जारी कराया गया। हम नशे पर चौतरफा वार कर रहे हैं। पाकिस्तान पोषित नार्को टेरर की समाप्ति की शुरुआत हो गई है। 100 दिन के बाद हम तस्करी के इस नेटवर्क को ही ध्वस्त कर देंगे।   

साजिश को नाकाम कैसे कर रहे? 

जम्मू-कश्मीर में शांति देख पाकिस्तान अब दो मोर्चों पर साजिश रच रहा है। पहला उसे आतंकी बनाने के लिए स्थानीय युवा नहीं मिल रहे हैं, तो उन्हें नशे की लत डालकर आतंकवाद की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में हमने टार्गेटेड 100 दिन का अभियान शुरू किया। तीन चरणों में आगे बढ़ रहे हैं। पहला नशा तस्करों के सप्लाई चेन को ध्वस्त कर रहे हैं। दूसरा जागरूकता अभियान से स्थानीय लोगों को जोड़ रहे हैं और तीसरा पुनर्वास। 

जब गाजीपुर या बनारस की याद आती है तो?

गाजीपुर मेरी जन्मभूमि और कर्मभूमि है। बाबा विश्वनाथ का भक्त हूं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ने का सौभाग्य मिला। मेरे अंदर जो भी अच्छा है वह काशी विश्वविद्यालय की ही देन है। कोई कमी है या कोई बुराई है, तो वह मेरी निजी है। बनारस की जब कभी याद आती है तो आंख बंद कर बाबा को याद कर लेता हूं। फिलहाल प्रधानमंत्री जी ने मुझे जो चुनौतीपूर्ण काम सौंपा है, उसी में रमा हूं। 

नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर की प्रेरणा कहां से मिली?  

युवाओं को नशे के दलदल से मुख्य धारा में लाने का यह प्रयास नशा मुक्त भारत अभियान का ही एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में 2047 तक ‘नशा मुक्त भारत’ बनाने का हम सभी ने राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें गृह मंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति है। जम्मू-कश्मीर की स्थिति थोड़ी दूसरी है। युवाओं को बरगलाने में लगातार असफल हो रहा पाकिस्तान अब नार्को टेरर की नर्सरी तैयार कर रहा है, जिसे हम ध्वस्त कर रहे हैं।    

तो नशे का आतंकवाद से सीधा संबंध है?  

तस्करी से मिले धन से आतंकियों की मदद की जा रही है। उनके लिए हथियार खरीदे जा रहे हैं। 2014 के बाद यहां आतंकवाद पर प्रभावी नियंत्रण शुरू हुआ। पहलगाम को छोड़ दें तो बीते छह वर्षों में हमें इसमें बड़ी सफलता मिली है। पहले कुपवाड़ा के केरन, माछिल और तंगधार सेक्टर के साथ ही बारामुला, बांदीपोरा से 300 से 400 युवा पाकिस्तान के बरगलाने पर आतंक की राह पर चल पड़ते थे। अब यह संख्या एक से दो पर सिमट गई है। युवा विकास को तरजीह दे रहे हैं। 

सेना, बीएसएफ, स्थानीय पुलिस और प्रशासन में सामंजस्य?  

पाकिस्तान से ड्रग तस्करी रोकने के लिए सेना, बीएसएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी पूरी शिद्दत से काम कर रहे हैं। कुपवाड़ा के तंगधार क्षेत्र से बड़ी मात्रा में तस्करी होती थी। उड़ी से भी खेप आती थी। जम्मू रीजन में कठुआ, सांबा में ड्रोन ड्रॉपिंग की समस्या रही। हम  बॉर्डर पर औचक निरीक्षण करा रहे हैं। इससे सप्लाई चेन तोड़ने में हमें सफलता मिल रही है। 

पुनर्वास की बात तो ठीक, युवाओं को मुख्य धारा में कैसे लाएंगे?  

नशे के दलदल में फंसे युवाओं को मुख्यधारा में लाना चुनौतीपूर्ण है। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और सीएचसी में बेड आरक्षित किए हैं। बेहतर इलाज की व्यवस्था की है। काउंसलर, मास्टर ट्रेनर तैनात किए गए हैं। हम इनकी निगरानी करेंगे। रोजगार से जोड़कर मुख्य धारा में लाएंगे। इनके पुनर्वास का पूरा प्रबंध है।    

कार्रवाई पर कुछ लोगों को आपत्ति क्यों?  

कुछ लोग नशा तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। राजनीति से इतर हम सभी को इस बदलाव को स्वीकार करना चाहिए। असल तो जो हमारी युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहे हैं, व्यवस्था को बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं, उनको कैसे छोड़ सकते हैं। मैं ऐसे लोगों को छोडूंगा भी नहीं। अपनी युवा पीढ़ी और जम्मू-कश्मीर को बचाना मेरी पहली प्राथमिकता है।

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