अप्रैल का महीना पूरा होने में अभी भी 10 दिन बाकी हैं, लेकिन गर्मी और धूप अभी से लोगों के लिए जिंदगी मुश्किल करने लगी है। पिछले दो-तीन दिनों से दिल्ली का तापमान 38-40 डिग्री के बीच बना हुआ है। तापमान बढ़ने के साथ-साथ लोगों की स्वास्थ्य संबंधित मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे उत्तर भारत में अभी से गर्मी का व्यापक असर देखा जा रहा है।
अमर उजाला में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए ये गर्मी मुश्किलें बढ़ाने लगी है। जिस समय महिलाओं को विशेष देखभाल की जरूरत होती है, गर्मी के कारण उनके लिए नींद पूरी करना तक कठिन हो गया है।
एक अन्य रिपोर्ट में हमने जानकारी दी थी कि मार्च 2026, इतिहास का चौथा सबसे गर्म मार्च रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में गर्मी और बढ़ने की आशंका जताई गई है, जो बीमारियों का खतरा भी बढ़ाने वाली हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को इन दिनों हीट स्ट्रोक से बचे रहने की भी सलाह दे रहे हैं।

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बढ़ती गर्मी का खतरा
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अप्रैल में ही बढ़ने लगा पारा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि आधा अप्रैल खत्म होते-होते दोपहर को सड़कें तपने लगी हैं, हवा में गर्मी बढ़ गई है जिस वजह से लोगों के लिए अभी से घरों से बाहर निकलना कठिन हो रहा है। इन दिनों जरा सी भी लापरवाही हीट स्ट्रोक का कारण बन सकती है। ये समस्या पहले से ही बीमार लोगों के लिए जानलेवा तक साबित हो सकती है।
अब सवाल ये है कि हीट स्ट्रोक यानी लू का खतरा किसे ज्यादा होता है और आप इससे बचाव कैसे कर सकते हैं?

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हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन
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लू लगने का खतरा किन्हें ज्यादा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हीट स्ट्रोक की दिकक्त किसी को भी हो सकती है। हर साल बड़ी संख्या में लू लगने के कारण लोगों को अस्पतालों में भर्ती होना पड़ता है।
- कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है। बुजुर्ग और छोटे बच्चों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
- बुजुर्गों का शरीर तापमान को सही तरीके से नियंत्रित नहीं कर पाता जिससे उनमें जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
- वहीं पांच साल से कम उम्र के बच्चों का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता, जिससे वे जल्दी डिहाइड्रेशन और लू का शिकार हो सकते हैं।
मजदूर, किसान, ट्रैफिक पुलिस या डिलीवरी वर्कर्स जैसे लोग जो धूप में लंबे समय तक काम करते हैं, उनके शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे लोगों में भी लू लगने का खतरा अधिक होता है।

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हीटस्ट्रोक के कारण क्या दिक्कतें होती हैं?
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लू लगने से क्या दिक्कतें होती हैं?
हीट स्ट्रोक की समस्या आपके लिए कई तरह से दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है। पहले से ही बीमारियों के शिकार जैसे डायबिटीज, हृदय रोग या हाई ब्लड प्रेशर वालों को लू जाने से ज्यादा दिक्कतें हो सकती हैं। इन बीमारियों के कारण शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है।
- डॉक्टर कहते हैं, हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। जब शरीर का तापमान 40°C या उससे अधिक हो जाता है।
- लू लगने के कारण आपको कंफ्यूजन, चक्कर आने और बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है।
- हीट स्ट्रोक की गंभीर स्थितियों में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है जिससे हार्ट और किडनी की दिक्कतें हो सकती है।
- हीट स्ट्रोक के दौरान शरीर से पसीना निकालना बंद हो जाता है है, जिससे त्वचा लाल हो जाती है।

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धूप-गर्मी से कैसे बचें?
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लू की दिक्कत से कैसे बचा जाए?
डॉक्टर कहते हैं, थोड़ी सी सावधानी आपको हीट स्ट्रोक और इसके कारण होने वाली दिक्कतों से बचाने में मददगार हो सकती है।
- शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है। दिनभर में खूब पानी पिएं। पानी के साथ ओआरएस, नींबू पानी या नारियल पानी भी पिएं।
- धूप से बचाव। दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर न निकलें।
- हल्के और ढीले कॉटन वाले कपड़े पहनें, ताकि शरीर को ठंडा रहने में मदद मिले।
- इसके अलावा, कैफीन और चाय का सेवन कम करें, क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं।
- अगर चक्कर, सिरदर्द या तेज बुखार जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत ठंडी जगह पर जाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस, न्यूज एजेंसी पीटीआई इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है।
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