क्या प्राइवेसी की आड़ में सुरक्षा से वाकई खिलवाड़ की आशंका है?
यह नया फीचर भारत के मौजूदा सख्त सुरक्षा नियमों को सीधे तौर पर चुनौती देता नजर आ रहा है। भारत के वर्तमान टेलीकॉम नियमों के अनुसार, हर मैसेजिंग अकाउंट का एक वेरिफाइड मोबाइल नंबर से लिंक होना अनिवार्य है। इसके अलावा, ‘टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स 2024 के तहत सरकार धोखाधड़ी रोकने के लिए सिम-बाइंडिंग जैसे बेहद कड़े चक्रों का उपयोग करती है, जो केवल यूजरनेम आधारित बातचीत से कमजोर हो सकते हैं। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि जब अपराधी केवल नाम बदलकर (जैसे बैंक अधिकारी या कस्टमर केयर एजेंट बनकर) लोगों से संपर्क करेंगे, तो पुलिस के लिए यह पता लगाना बेहद जटिल हो जाएगा कि उस स्क्रीन नाम के पीछे असली अपराधी कौन है, जिससे जांच का एक अतिरिक्त सिरदर्द पैदा हो जाएगा।
मेटा ने क्या दी सफाई?
मेटा ने साफ तौर पर कहा है कि आगामी यूजरनेम फीचर पूरी तरह से ऑप्शनल होगा। इसका मतलब यह है कि किसी भी यूजर के लिए यूजरनेम बनाना अनिवार्य ही नहीं होगा, जो लोग अपने मोबाइल नंबर के जरिए ही चैट करना चाहते हैं, वे पहले की तरह ही एप का इस्तेमाल जारी रख सकेंगे। इसके साथ ही कंपनी ने इंटरनेट पर फैल रही उन अफवाहों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि कोई भी रैंडम यूजर किसी मशहूर हस्ती या ब्रांड का यूजरनेम पहले से रिजर्व कर सकता है।
फर्जी पहचान रोकने के लिए होंगे क्या होंगे सुरक्षा उपाय?
मेटा ने साफ किया है कि यूजर नेम फीचर लॉन्च करने से पहले इसमें कई सुरक्षा परतें जोड़ी गई हैं, जिससे पहचान छिपाकर की जाने वाली धोखाधड़ी को रोका जा सके।
कंपनी के अनुसार इंस्टाग्राम और फेसबुक के मौजूदा यूजरनेम रिजर्व रहेंगे। सेलिब्रिटी, सरकारी संस्थानों और मेटा वैरिफाइड अकाउंट्स के नाम सुरक्षित रखे जाएंगे। इनके जैसे मिलते-जुलते यूजरनेम पर भी कोई दूसरा दावा नहीं कर सकेगा। इसके अलावा वायरल हो रही उन खबरों को भी मेटा ने गलत बताया, जिनमें कहा जा रहा था कि कोई भी मशहूर नाम पहले रिजर्व कर सकता है।
अनजान यूजर का मैसेज आने पर क्या दिखेगा?
व्हाट्सएप ने बताया कि जब यह फीचर लॉन्च होगा, तब किसी अनजान व्यक्ति के मैसेज आने पर यूजर को चेतावनी दिखाई जाएगी। जिसमें भेजने वाले के देश और खाते से जुड़ी अहम जानकारी शामिल होगी।
यूजरनेम सर्च को लेकर क्या दी सफाई?
मेटा ने यह भी साफ किया है कि मोबाइल नंबर की तरह यूजरनेम को सर्च नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा यूजर्स चाहें तो यूजरनेम की भी चालू कर सकते हैं। इस स्थिति में किसी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए सिर्फ यूजरनेम नहीं, बल्कि उसकी यूजरनेम की भी जरूरी होगी। इससे अनचाहे संपर्क और फर्जी अकाउंट का खतरा कम होगा।
व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर पहली नजर में प्राइवेसी और बिना नंबर शेयर किए बात करने की आजादी देने वाला एक शानदार कदम लग सकता है। हालांकि, भारत जैसे विशाल और संवेदनशील डिजिटल बाजार में, जहां सुरक्षा पहले से ही एक बड़ी चुनौती है, वहां यह बदलाव बड़ी सुरक्षा खामियां पैदा कर सकता है। हालांकि मेटा ने दावा किया है कि वह मशहूर हस्तियों और ब्रांड्स के नाम सुरक्षित (रिजर्व) रखेगी और अनजान कॉल्स पर अतिरिक्त देश कोड व अकाउंट उम्र जैसी चेतावनियों के साथ यूजरनेम की जैसे सुरक्षा कवच देगी, लेकिन अपराधियों के शातिर तरीकों को देखते हुए ये उपाय काफी नहीं लगते।


