सबूत मिटाने के लगे आरोप
दान प्रबंधन की गड़बड़ियों को छिपाने के लिए नकदी छांटने वाले क्षेत्र के सात से आठ महीने के सीसीटीवी फुटेज को कथित तौर पर डिलीट किए जाने के आरोप भी सामने आए। राम मंदिर के पूर्व अकाउंट्स-इन-चार्ज और मामले का खुलासा करने वाले महिपाल सिंह ने दावा किया कि जब उन्होंने इन अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।
कर्मचारियों की बेहिसाब संपत्तियों का खुलासा
यह विवाद तब और गहरा गया जब सरकार की तरफ से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के जांचकर्ताओं ने पाया कि दान गिनने में शामिल कुछ कर्मचारियों, जिनका मासिक वेतन 18,000-20,000 रुपये है, ने 1.5 करोड़ रुपये और 40 लाख रुपये की महंगी जमीनें और गाड़ियां खरीदी हैं, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक है।

23 जून: एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य के गृह विभाग को सौंप दी, जिसमें आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की सिफारिश की गई थी।
25 जून: मामला उजागर होने के लगभग 19-20 दिन बाद और एसआईटी की सिफारिश के आधार पर, ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के करीबियों सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। रात भर चली पूछताछ के बाद आरोपियों के पास से दानपात्र से चोरी की गई रकम बरामद की गई।
26 जून: गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 29 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इसी दिन, लगातार उठ रहे सवालों, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और प्रशासनिक जवाबदेही के दबाव में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।
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