देश की राजनीति में इस वक्त बगावतों का दौर चल रहा है। पहले आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा कैंप में बगावत, फिर तमिलनाडु के चुनाव नतीजे आने के बाद अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के सांसदों का बागी रवैया, इसके बाद पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों और विधायकों का टूटना और अब महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव-बालासाहेब) ठाकरे में एक और टूट की आहट। यानी एक के बाद एक चार दलों में बागी नेताओं ने सियासी हलचल बढ़ा दी हैं।
महाराष्ट्र में यह सियासी हलचल कई मायनों में अहम है। दरअसल, 2022 में ही उद्धव के नेतृत्व वाली शिवेसना के कई विधायक और सांसद टूट चुके हैं। इसके चलते उद्धव ठाकरे को अपनी पार्टी शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न दोनों खोने पड़े थे। अब एक बार फिर पार्टी के कुछ सांसदों के टूटने की आशंका जताई जा रही है। इसे लेकर महाराष्ट्र से दिल्ली तक राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है। शिवसेना-यूबीटी ने सीधे तौर पर इसे भाजपा की साजिश करार दिया है। महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को ऑपरेशन टाइगर का भी नाम दिया है।