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Drug Sampling Rules:नकली-घटिया दवाओं पर सरकार की सख्ती, गांव-देहात तक होगी जांच; मेडिकल स्टोर भी रडार पर – Cdsco Guidelines Drug Sampling Rules Quality Check Medical Device Regulation Fake Medical Store Inspection

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देश में नकली, घटिया और मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली दवाओं पर अब और सख्ती होने जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO ने दवाओं, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल डिवाइस के सैंपल लेने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब केवल शहरों में ही नहीं, बल्कि गांवों, दूरदराज इलाकों और आदिवासी क्षेत्रों में भी दवाओं की जांच की जाएगी। इसका मकसद यह पता लगाना है कि अंतिम मरीज तक पहुंच रही दवाएं सुरक्षित और सही गुणवत्ता की हैं या नहीं।

CDSCO ने कहा है कि पहले दवा सैंपल लेने का कोई तय तरीका नहीं था। ज्यादातर जांच शहरों और बड़े ब्रांड की दवाओं तक सीमित रहती थी। इससे गांवों और अंदरूनी इलाकों में बिक रही दवाओं की गुणवत्ता का सही आकलन नहीं हो पाता था। अब नए नियमों के तहत हर दवा निरीक्षक को हर महीने तय संख्या में सैंपल लेने होंगे और उनकी रिपोर्ट भी तैयार करनी होगी।

ये भी पढ़ें- CBSE: सीबीएसई ने ओएसएम पोर्टल में हैकिंग के दावों को नकारा, वायरल यूआरएल को बताया ‘टेस्टिंग साइट’

नए दिशा-निर्देशों में क्या बदला?

नए नियमों के अनुसार हर दवा निरीक्षक को हर महीने कम से कम 10 सैंपल लेने होंगे। इनमें नौ दवाओं के और एक कॉस्मेटिक या मेडिकल डिवाइस का सैंपल शामिल रहेगा। निरीक्षकों को ग्रामीण, आदिवासी और बीमारी प्रभावित इलाकों में भी जांच करनी होगी। मौसमी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर भी खास नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही संदिग्ध दवाओं और सप्लाई चेन को प्राथमिकता देने को कहा गया है। जिन दवाओं पर जरूरत से ज्यादा छूट दी जा रही हो, जिनके लेबल से छेड़छाड़ दिखे या पैकिंग खराब हो, उन्हें जांच के लिए पहले चुना जाएगा।

 































नए नियम



क्या बदलाव हुआ



हर महीने सैंपल



10 सैंपल अनिवार्य



जांच का दायरा



गांव, आदिवासी और दूरदराज क्षेत्र शामिल



प्राथमिकता



संदिग्ध और घटिया दवाएं



रिपोर्टिंग



हर महीने सार्वजनिक अलर्ट



निगरानी



नकली दवाओं से जुड़े विक्रेताओं पर सख्ती


किन दवाओं और दुकानों पर रहेगी ज्यादा नजर?

CDSCO ने उन मेडिकल स्टोर और सप्लायरों पर खास निगरानी रखने को कहा है, जहां पहले भी घटिया या नकली दवाएं मिलने के मामले सामने आए हैं। सीमा क्षेत्रों में मौजूद मेडिकल स्टोर और रात में संचालित होने वाली दुकानों को भी निगरानी में रखा जाएगा। इसके अलावा ऐसी दवाओं पर भी सख्ती होगी जो किसी मशहूर ब्रांड जैसी दिखती हैं या अनधिकृत सप्लाई चेन के जरिए बाजार में पहुंच रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि ऐसी दवाएं मरीजों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।

खराब दवाएं लोगों के लिए कितना बड़ा खतरा हैं?

दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि घटिया और नकली दवाएं इलाज को असफल बना सकती हैं। इससे मरीजों की हालत बिगड़ सकती है, दवाओं का असर कम हो सकता है और मौत का खतरा भी बढ़ सकता है। खासकर कमजोर मरीजों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर इसका ज्यादा असर पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गलत दवाओं के कारण शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है, जिससे भविष्य में इलाज और मुश्किल हो सकता है। इसी खतरे को देखते हुए अब सैंपल जांच और रिपोर्टिंग व्यवस्था को ज्यादा मजबूत किया गया है।

लोगों को कैसे मिलेगी जानकारी और क्या होगा फायदा?

CDSCO ने निर्देश दिया है कि घटिया और नकली दवाओं से जुड़े अलर्ट हर महीने सार्वजनिक किए जाएंगे। इन्हें CDSCO की वेबसाइट पर डाला जाएगा ताकि लोग सतर्क रह सकें। इसके अलावा ऐसे थोक और खुदरा विक्रेताओं का केंद्रीकृत डाटाबेस भी बनाया जाएगा जो नकली दवाओं या टूटी सप्लाई चेन से जुड़े पाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और बाजार में नकली दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। नए नियमों में दवाओं, वैक्सीन, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल डिवाइस की लैब जांच के लिए जरूरी सैंपल मात्रा भी तय की गई है।

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