Black Money: भारत सरकार की देश में रहने वाले लोगों पर तो नजर है ही, लेकिन उनकी संपत्ति पर भी कड़ी नजर है. ना केवल भारत में बल्कि जिसकी संपत्ति विदेशों में है उस पर भी सरकारी की पूरी नजर है. विदेशों में संपत्ति जमा करने वाले लोगों को अब अपना पूरा ब्यौरा सरकार को देना होगी. यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उनके ऊपर काला धन एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई होगी.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल सरकार 1 जुलाई 2026 से फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स डिस्क्लोजर स्कीम (FAST-DS) शुरू करने जा रही है. इस योजना के तहत लोगों को 31 दिसंबर 2026 तक कुल छह महीने का मौका मिलेगा, जिसमें उन्हें अपनी विदेशों में मौजूद ऐसी संपत्तियों और आय की जानकारी देना होगी, जिन्हें पहले इनकमटैक्स रिटर्न में नहीं बताया गया था. यदि इन छह महीनों में वो ऐसा नहीं करते हैं तो उन पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
इस बारे में एनडीटीवी प्रॉफिट को सरकार से जुड़े एक सूत्र ने बताया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये योजना खास तौर पर मिडिल क्लास और छोटे टैक्सपेयर्स के लिए लाई जा रही है. इसमें विदेशी कंपनियों के ESOP रखने वाले आईटी प्रोफेशनल्स, विदेश से लौटे NRI और विदेश में पढ़ाई के दौरान बैंक खाते या छोटी संपत्ति रखने वाले छात्र शामिल हैं.
योजना के बारे में
ये योजना दो श्रेणियों में कार्य करेगी, पहली श्रेणी में 1 करोड़ रुपये तक की अघोषित विदेशी संपत्तियां और आय आएंगी. इन्हें घोषित करने पर संपत्ति के बाजार मूल्य का 60% टैक्स देना होगा. तो वहीं दूसरी श्रेणी में 5 करोड़ रुपये तक की ऐसी विदेशी संपत्तियां शामिल होंगी, जिनकी आय भारत में दिखाकर टैक्स चुका दिया गया था, लेकिन विदेशी संपत्तियों की जानकारी आयकर रिटर्न के Schedule FA में नहीं दी गई थी. ऐसे मामलों में केवल एक बार 1 लाख रुपये का शुल्क देना होगा.
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क्यों जरूरी है ये योजना?
बता दें कि इस योजना को लागू करने के पीछे सरकार का उद्देश्य लोगों को ब्लैक मनी एक्ट के तहत भारी जुर्माने से बचाना है. सीमित समय के भीतर जो लोग अपनी विदेशी संपत्तियों के बारे में सही खुलासा कर देंगे वो ब्लैक मनी एक्ट के तहत भारी जुर्माने और आपराधिक कार्रवाई से बच जाएंगे. खासकर टेक प्रोफेशनल्स और विदेश से लौटे भारतीयों के लिए ये योजना पुराने रिकॉर्ड को सही करने का एक बड़ा अवसर मानी जा रही है.
