'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- सुलभ, जिसका अर्थ है- सहज, सुगम, सहज में प्राप्त होनेवाली (वस्तु), (व्यक्ति) जिसे सरलता से मिला जा सके। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद की कविता- तुम्हारा स्मरण
सकल वेदना विस्मृत होती
स्मरण तुम्हारा जब होता
विश्वबोध हो जाता है
जिससे न मनुष्य कभी रोता
आँख बंद कर देखे कोई
रहे निराले में जाकर
त्रिपुटी में, या कुटी बना ले
समाधि में खाये गोता
खड़े विश्व-जनता में प्यारे
हम तो तुमको पाते हैं
तुम ऐसे सर्वत्र-सुलभ को
पाकर कौन भला खोता
प्रसन्न है हम उसमे, तेरी-
प्रसन्नता जिसमें होवे
अहो तृषित प्राणों के जीवन
निर्मल प्रेम-सुधा-सोता
यह भी पढ़ें
रूस-ईरान से तेल नहीं खरीद पाएगा भारत, डेडलाइन खत्म, ट्रंप के करीबी बेसेंट ने कहा- ‘अब और नहीं…’नये-नये कौतुक दिखलाकर
जितना दूर किया चाहो
उतना ही यह दौड़-दौड़कर
चंचल हृदय निकट होता
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
एक घंटा पहले

