‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- मैया, जिसका अर्थ है- माता, माँ। प्रस्तुत है रंजना वर्मा की कविता- बहुत दिनों के बाद मिली है
बहुत दिनों के बाद मिली है घर से माँ की चिट्ठी।
साथ भेज दी मैया ने आँगन की थोड़ी मिट्टी॥
आओ सखियों इस मिट्टी को
मिल जुल शीश लगायें,
बीती वो बचपन की बातें
फिर आओ दुहरायें।
याद बहुत आते बचपन के कंकर पत्थर गिट्टी।
बहुत दिनों के बाद मिली है घर से माँ की चिट्ठी॥
खूब सँवारा करती थी माँ
मेरा रूप सलोना,
पीतल के गहने भी तो तब
लगते जैसे सोना।
लेती उठा गोद मे मैया कहती गोरी चिट्टी।
बहुत दिनों के बाद मिली है घर से माँ की चिट्ठी॥
खिरनी और फालसा थे
शहतूत बड़े मतवारे,
बड़हल कटहल के कोए
बैंगन के भुरते प्यारे।
अब तक स्वाद भरा है मुँह में जो खायी थी लिट्टी।
बहुत दिनों के बाद मिली है घर से माँ की चिट्ठी॥
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