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US Iran War: ईरान वॉर के बीच अमेरिकी हथियारों की चमक पड़ी फीकी, जानें खाड़ी देशों ने कहां किया रुख

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US Iran War: खाड़ी देशों की रक्षा नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर अब अपने रक्षा हथियारों के लिए अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते. मिसाइल हमलों और ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के बीच इन देशों ने अपनी सुरक्षा रणनीति में विविधता लाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं.

अमेरिकी हथियारों की देरी और सुरक्षा चिंताओं से बढ़ी नाराजगी

पिछले कुछ वर्षों में अरब देशों ने रक्षा पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पूर्ण सुरक्षा नहीं मिल पाई. अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति में देरी और पेंटागन की लंबी प्रतीक्षा सूची ने खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषकर यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका की प्राथमिकताओं में बदलाव आया है, जिससे पैट्रियट मिसाइलों की सप्लाई प्रभावित हुई है.

सऊदी, यूएई और कतर की नई रक्षा साझेदारी

अब सऊदी अरब जापान और दक्षिण कोरिया की कंपनियों से रक्षा उपकरणों की खरीद को लेकर बातचीत कर रहा है.

  • सऊदी अरब जापान से पैट्रियट मिसाइल सिस्टम के घटक लेने पर विचार कर रहा है
  • दक्षिण कोरियाई कंपनियों हनवा और LIG Nex1 से M SAM मिसाइल सिस्टम पर बातचीत चल रही है
  • यूएई पहले ही दक्षिण कोरिया की मिसाइल रक्षा प्रणाली तैनात कर चुका है
  • खाड़ी देश यूक्रेन से ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम लेने में भी रुचि दिखा रहे हैं

2019 के हमलों के बाद बढ़ी सुरक्षा जरूरत

2019 में सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हुए हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया था. इसके बाद खाड़ी देशों ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत किया. हालिया संघर्षों में उन्होंने 85% तक ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने में सफलता भी हासिल की है.

रियाद रक्षा प्रदर्शनी में दिखा वैश्विक शक्ति संतुलन बदलाव
रियाद में आयोजित रक्षा प्रदर्शनी में अमेरिकी कंपनियों के साथ साथ चीनी, रूसी और तुर्की कंपनियों की मौजूदगी ने बदलते समीकरणों को साफ कर दिया है. खाड़ी देश अब सिर्फ हथियार खरीदना नहीं चाहते, बल्कि अपने देश में उत्पादन भी करना चाहते हैं. हालांकि पश्चिमी कंपनियां तकनीक साझा करने में अभी भी सतर्क हैं, जिससे तनाव बढ़ रहा है.

अधिकारियों का बयान और नई रणनीति

सऊदी और यूएई अधिकारियों ने कहा है कि वे अमेरिका के साथ सहयोग जारी रखेंगे, लेकिन अन्य देशों के साथ भी मजबूत रक्षा संबंध बनाए जा रहे हैं. यूएई ने दावा किया कि उसके पास अब बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली मौजूद है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाती है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी संकेत दिए हैं कि उनका देश अब अपने रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा अमेरिका को नहीं देगा. ब्रिटेन भी रक्षा आपूर्ति में तेजी और आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रहा है.

ये भी पढ़ें: चीन की ‘आंख’ से अमेरिका पर ईरान ने दागीं मिसाइलें, आई ऐसी रिपोर्ट, जिसे पढ़कर आगबबूला हो जाएंगे शी जिनपिंग

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