पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिकी पाबंदी के बावजूद दो मालवाहक जहाज ईरान के बंदरगाहों तक पहुंचने में सफल रहे। ब्रिटिश शिपिंग मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन जहाजों ने पकड़े जाने से बचने के लिए अपने ‘स्वचालित पहचान प्रणाली’ (एआईएस) के डेटा में चालाकी से बदलाव किया था।
ब्रिटिश मीडिया संस्थान ‘लॉयड लिस्ट’ ने बताया कि जब से अमेरिका ने ईरान आने-जाने वाले जहाजों पर पाबंदी लगाई है, तब से कुछ जहाज अपनी मंजिल की जानकारी बदल रहे हैं। ईरान के झंडे वाले दो कंटेनर जहाजों ने पहले अपनी मंजिल दक्षिणी ईरान का ‘बंदर अब्बास’ बंदरगाह बताया था। लेकिन नाकेबंदी शुरू होते ही उन्होंने अपने संदेश को बदलकर ‘पीजी पोर्ट्स’ (फारस की खाड़ी के बंदरगाह) कर दिया। इस चालाकी की मदद से वे मंगलवार को सफलतापूर्वक बंदर अब्बास पहुंच गए। जानकारों का कहना है कि जहाजों के इस कदम से अमेरिकी खुफिया तंत्र के लिए जानकारी जुटाना मुश्किल हो जाएगा। अब इन जहाजों को ट्रैक करने के लिए अमेरिका को और ज्यादा संसाधनों की जरूरत पड़ेगी।
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मंगलवार को बताया कि इस मिशन में 10,000 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। इनमें नाविक, मरीन और वायु सैनिक शामिल हैं। इस घेराबंदी में एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत और दर्जनों विमानों की मदद ली जा रही है। अमेरिका का कहना है कि वे बिना किसी भेदभाव के हर देश के जहाज को रोक रहे हैं। कमांड ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि छह व्यापारिक जहाजों ने उनके आदेश को माना और वे ओमान की खाड़ी की ओर वापस मुड़ गए।
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अमेरिकी सेना का दावा है कि पहले 24 घंटों में कोई भी जहाज उनकी नाकेबंदी को पार नहीं कर पाया। यह पाबंदी फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी तटीय इलाकों पर लागू है। हालांकि, समुद्री डेटा फर्म ‘केप्लर’ का कहना है कि सोमवार से अब तक कम से कम नौ व्यापारिक जहाजों ने इस रास्ते को पार किया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाके में अमेरिका के कम से कम 15 युद्धपोत मौजूद हैं।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अगर ईरान का कोई भी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी के करीब आता है, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे इन जहाजों के खिलाफ वैसी ही कार्रवाई करेंगे जैसी समुद्र में ड्रग तस्करों के खिलाफ की जाती है।
बता दें कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद से इस समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही बहुत कम हो गई है। पहले यहां से रोजाना 100 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, जो अब घटकर 10 प्रतिशत से भी कम रह गए हैं।
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