'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- मंजु, जिसका अर्थ है- सुन्दर, मनोहर , आकर्षक। प्रस्तुत है सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता- कुंज-कुंज कोयल बोली है
कुंज-कुंज कोयल बोली है,
स्वर की मादकता घोली है।
कांपा है घन पल्लव-कानन,
गूँजी गुहा श्रवण-उन्मादन,
तने सहज छादन-आच्छादन,
नस ने रस-वशता तोली है।
गृह-वन जरा-मरण से जीकर
प्राणों का आसव पी-पीकर
झरे पराग-गन्ध-मधु-शीकर,
सुरभित पल्लव की चोली है।
तारक-तनु रवि के कर सिंचित,
नियमित अभिसारक जीवित सित,
आमद-पद-भर मंजु-गुंजरित
अलिका की कलिका डोली है।
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6 घंटे पहले


