ईरान और यमन में सोमवार को सैन्य और राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने रक्षा मंत्रालय की कमान के लिए मेहरदाद अखलागी के नाम का प्रस्ताव रखा है. वहीं, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की है.
सेना ने दावा किया है कि उसने धुबाब जिले के साथ बाब अल-मंदेब के पास कई अहम ठिकानों पर दोबारा कब्जा कर लिया है. हालांकि, हूती समूह ने इस दावे को खारिज किया है.
मेहरदाद अखलागी होंगे ईरान के नए रक्षा मंत्री?
अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, पेजेशकियन ने रक्षा मंत्री पद के लिए जिन मेहरदाद अखलागी के नाम का प्रस्ताव दिया है, वह हाल तक रक्षा मंत्रालय में वरिष्ठ कार्यकारी पद पर काम कर रहे थे. इससे पहले वह एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन के मुख्य संचालन अधिकारी के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.
अब ईरानी संसद की संबंधित समिति अखलागी की प्रस्तावित योजनाओं की समीक्षा करेगी. इसके बाद संसद में उनके नाम पर विश्वास मत कराया जाएगा.
युद्ध की शुरुआत से खाली है रक्षा मंत्रालय
ईरान के रक्षा मंत्रालय में अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से कोई स्थायी प्रमुख नहीं है. शुरुआती हवाई हमलों के दौरान ब्रिगेडियर जनरल अजीज नसीरजादेह की मौत हो गई थी. इसके बाद कई सैन्य कमांडरों ने अस्थायी तौर पर मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली है.
यमन में हूती के खिलाफ ‘यमन डॉन’ अभियान
यमन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत की है. सेना ने इस अभियान का नाम ‘यमन डॉन’ रखा है. सेना का कहना है कि उसने बाब अल-मंदेब के करीब धुबाब जिले और कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है. हूती विद्रोहियों ने सेना के इस दावे से इनकार किया है.
मोखा पर भी कब्जे का दावा
यमन की सरकार समर्थक सबा समाचार एजेंसी ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से दावा किया है कि सरकारी बलों ने ताइज प्रांत के पश्चिम में स्थित रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर भी कब्जा कर लिया है.
सितंबर में ईरान समर्थित हूती समूह ने यमन के पश्चिमी लाल सागर तट पर बड़ी बढ़त बनाई थी. समूह ने रणनीतिक शहर और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया था. इन बढ़त के बाद हूती लड़ाकों का बाब अल-मंदेब के यमन वाले हिस्से पर नियंत्रण हो गया था.
बाब अल-मंदेब क्यों है इतना अहम?
मोखा यमन में हूती और सऊदी समर्थित सरकार के बीच चल रही लड़ाई का एक अहम केंद्र रहा है. इस शहर की रणनीतिक स्थिति के कारण इसका महत्व यमन की सीमाओं से काफी आगे तक है.
मोखा बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 75 किलोमीटर उत्तर में स्थित है. यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. ऐसे में इस इलाके पर नियंत्रण का असर लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच होने वाले समुद्री आवागमन पर भी पड़ सकता है.
ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना
बाब अल-मंदेब पर हूती नियंत्रण को लेकर ईरानी अधिकारियों की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है. ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार मेजर जनरल याह्या रहीम सफवी ने इस घटनाक्रम को क्षेत्र में अमेरिका की बड़ी हार की दिशा में एक और कदम बताया.
उन्होंने कहा कि अमेरिका खाड़ी की सुरक्षा व्यवस्था को संभालने में नाकाम रहा है. उनका तर्क था कि अमेरिका ने इस क्षेत्र में सैन्य ठिकानों और हथियारों पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पर नियंत्रण हासिल नहीं किया.
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