कर्नाटक में जेल विभाग के उपमहानिरीक्षक स्तर के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने 2018 में सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश के जरिये उम्रकैद की सजा पाए एक कैदी को जेल से रिहा कराने में मदद की। पुलिस ने यह जानकारी दी।
आरोपी एम. सोमशेखर हैं। उस समय वह बंगलूरू केंद्रीय जेल के मुख्य अधीक्षक थे। फिलहाल वह कलबुर्गी में जेल विभाग के उत्तरी क्षेत्र में उपमहानिरीक्षक के पद पर काम कर रहे हैं।
पत्नी ने क्या आरोप लगाया?
पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान इस मामले में कैदी की पत्नी को भी गिरफ्तार किया गया था। उसने आरोप लगाया कि अपने पति को केंद्रीय जेल से रिहा कराने के लिए सोमशेखर ने उसका यौन शोषण किया था। पुलिस ने कहा कि इस आरोप की भी जांच चल रही है।
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कैसे सामने आया फर्जी आदेश का मामला?
पुलिस के अनुसार, यह मामला इस साल मई में सामने आया। बंगलूरू केंद्रीय जेल के मौजूदा प्रभारी अधीक्षक ने परप्पना अग्रहारा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि एक दोषी कैदी को 13 नवंबर 2018 को रिहा किया गया था। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के कथित आदेश को फर्जी बनाया गया था। इसके बाद मामला दर्ज किया गया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दोषी कैदी पर चिकपेट थाने में दर्ज एक मामले में मुकदमा चला था। यह मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 में चला था। 12 जुलाई 2004 को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी ने सजा रद्द कराने के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। लेकिन दोनों ऊपरी अदालतों ने उसकी सजा बरकरार रखी थी।
किसने बनाया था फर्जी आदेश?
अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि उस समय केंद्रीय जेल के दोषी कैदी विभाग में दूसरे श्रेणी के सहायक के तौर पर काम कर रहे श्रीकांत एस. ने एक आदेश की प्रति फर्जी बनाई थी। यह आदेश कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था।
इस फर्जी आदेश में दिखाया गया था कि संबंधित दोषी कैदी की आपराधिक अपील पर 2 नवंबर 2018 को उसे रिहा करने का आदेश दिया गया है। इस फर्जी आदेश के आधार पर कैदी को 13 नवंबर 2018 को केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया।
कैदी की पत्नी ने क्या बताया?
जांच के दौरान पुलिस ने कैदी की पत्नी से भी पूछताछ की। पुलिस ने बताया कि उसने कहा कि उस समय के मुख्य अधीक्षक ने भी उसके पति को केंद्रीय जेल से रिहा कराने में मदद की थी। इसके बाद पुलिस ने श्रीकांत और दोषी कैदी की पत्नी दोनों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस ने बताया कि जांच आगे बढ़ने के दौरान पता चला कि सोमशेखर ने मामले की जांच में सहयोग नहीं किया था। उन्होंने मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी छिपाई थी। इसके बाद रविवार को सोमशेखर को हिरासत में लिया गया। उन्हें अदालत में पेश किया गया। आगे की जांच के लिए उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में लिया गया है।

