ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शनिवार को कहा कि तेहरान ने मौजूदा विशेष परिस्थितियों से निपटने के लिए ‘नई व्यवस्था अपनाई है’। उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है, जब अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। अमेरिका ईरान के वित्तीय और कारोबारी नेटवर्क को निशाना बनाते हुए प्रतिबंध भी बढ़ा रहा है।
पेजेशकियन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अमेरिका समेत अपने विरोधियों पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे ईरान की अर्थव्यवस्था की जरूरी कड़ियों को काटना चाहते हैं। इसका मकसद ईरान के लोगों पर दबाव डालना है।
उन्होंने कहा कि बढ़ते दबाव के बावजूद जनता के समर्थन और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की वजह से इन कोशिशों को कामयाब नहीं होने दिया गया।
पेजेशकियन ने अपनी पोस्ट में कहा, सरकार ने इन विशेष परिस्थितियों से निपटने के लिए एक नई व्यवस्था अपनाई है। पिछले कुछ महीनों में दुश्मन की योजना देश की जरूरी आर्थिक कड़ियों को काटने की रही है। इसका मकसद ईरान के सम्मानित लोगों पर दबाव डालना है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक दबाव बढ़ा है। लेकिन जनता के साथ और सरकार में उनके साथियों की ओर से उठाए गए कदमों की मदद से आर्थिक युद्ध में दुश्मन के उद्देश्यों को पूरा नहीं होने दिया गया।
अमेरिका ने ईरान पर दबाव क्यों बढ़ाया?
पेजेशकियन का यह बयान अमेरिका की ओर से ईरान की अर्थव्यवस्था पर चलाए जा रहे व्यापक प्रतिबंध अभियान के बीच आया है। अमेरिका उन नेटवर्क को भी निशाना बना रहा है, जिनका इस्तेमाल ईरानी शासन और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का समर्थन करते हैं।
अगस्त में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया था। अमेरिका ने इसे ईरान और उसे मदद देने वालों के खिलाफ ‘अभूतपूर्व, पूरी सरकार की आर्थिक मुहिम’ बताया था। इस अभियान के शुरू होने के बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया। इन अधिकारियों ने अलग-अलग सरकारों से ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की।
ईरान की कमाई के रास्ते रोकना चाहता है अमेरिका?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट का मकसद ईरानी शासन और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को बनाए रखने वाले आर्थिक रास्तों को काटना है। मंत्रालय ने कहा कि ये कदम एक लंबे और व्यवस्थित अभियान का हिस्सा हैं। इसका मकसद ईरान को मदद देने वाले हर वित्तीय स्रोत को बंद करना है। अमेरिका ईरान को आतंकवाद का समर्थन करने वाला प्रमुख देश बताता है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा कि उसने उन नेटवर्क, मददगारों और वित्तीय रास्तों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल ईरान तेल की तस्करी करने, प्रतिबंधों से बचने और आतंकवाद के लिए धन जुटाने में करता है। मंत्रालय ने कहा कि वह ईरानी शासन की अवैध कमाई के किसी भी स्रोत को निशाना बनाने में कोई नरमी नहीं बरतेगा।
अब ईरान के विमानन क्षेत्र पर भी दबाव
अमेरिका का नया दबाव ईरान के विमानन क्षेत्र तक भी पहुंच गया है। वाशिंगटन ने विदेशी कंपनियों और सेवा देने वाली कंपनियों को चेतावनी दी है। उसने कहा कि अगर वे ईरानी विमानन कंपनियों को मदद देना जारी रखते हैं, तो उन पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
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पिछले महीने अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने उन ईरानी विमानन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए, जिन्हें पहले निशाना नहीं बनाया गया था। इसके साथ ही ईरान के विमानन क्षेत्र को मदद देने वाली ईरान के बाहर की कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए।
विमानन क्षेत्र पर कितना असर?
ईरान का विमानन क्षेत्र पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण काफी पाबंदियों का सामना कर रहा है। इन प्रतिबंधों की वजह से ईरानी विमानन कंपनियों के लिए नए विमान खरीदना मुश्किल हुआ है। उन्हें विमानों के जरूरी कलपुर्जे हासिल करने में भी परेशानी होती है। इसके अलावा, रखरखाव की सेवाएं हासिल करना भी मुश्किल है।
अमेरिका के ताजा कदम ईरान की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने वाली व्यापक प्रतिबंध व्यवस्था का हिस्सा हैं। इसमें ईरान के ऊर्जा, जहाजरानी, तकनीक, सोना और डिजिटल संपत्ति से जुड़े क्षेत्र भी शामिल हैं।
