अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने शनिवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गणेश चतुर्थी के दौरान होने वाला गणेश मूर्तियों का विसर्जन खत्म हो गया है। अब मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का ‘विसर्जन’ बाकी है।

प्रकाश राज ने पश्चिम बंगाल से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र किया। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों ने नाम वापस जोड़ने के लिए 38 लाख अपील की हैं। ये अपीलें ट्रिब्यूनल के सामने लंबित हैं। इन्हें तय करने में 10 से 12 साल लग सकते हैं।
प्रकाश राज ने सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में लोग क्या 10 से 12 साल तक इंतजार करेंगे? उन्होंने पत्रकारों से कहा, कर्नाटक, आंध्र और पूरे भारत में गणेश विसर्जन खत्म हो गया है। अब ज्ञानेश कुमार का विसर्जन बाकी है।
प्रकाश राज ने कहा कि एसआईआर शुरू होने के समय इसे मतदाता सूची की सफाई की प्रक्रिया बताया गया था। लेकिन अब उनके अनुसार यह नाम जोड़ने की प्रक्रिया नहीं रह गई है। यह नाम हटाने की प्रक्रिया बन गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव सिर्फ आंकड़ों का नाम नहीं है। चुनाव इस देश के उन नागरिकों से जुड़े हैं, जो जिंदा हैं।
प्रकाश राज ने बताया कि उन्होंने 10 दिन तक अलग-अलग जिलों का दौरा किया। उन्होंने वहां लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि लोगों ने उन्हें बताया कि उनके नाम मतदाता सूची से ‘हटा दिए गए’। इसकी वजह यह थी कि जब बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ उनके घर पहुंचे, तब वे घर पर नहीं थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि काम के लिए दूसरी जगह गए दिहाड़ी मजदूरों के नाम भी मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ‘मन की बात’ करते हैं। क्या उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के बारे में लोगों को पहले से बताया था? प्रकाश राज ने कहा, हमारी मांग है कि एसआईआर को रोका जाए और इसे पूरी तरह खत्म किया जाए।
प्रकाश राज की टिप्पणी पर भाजपा ने क्या कहा?
इस बीच, तेलंगाना भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एनवी सुभाष ने प्रकाश राज के बयान की आलोचना की। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ की गई टिप्पणी को ‘अपमानजनक’ बताया। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त एक सांविधानिक संस्था के प्रमुख हैं।
सुभाष ने एक बयान में कहा कि प्रकाश राज को निर्वाचन आयोग की आलोचना करने का अधिकार हो सकता है। लेकिन सीईसी की तुलना मूर्ति विसर्जन से करना राजनीतिक आलोचना की सीमा पार करता है। उनके अनुसार, यह एक सांविधानिक संस्था के प्रति अनादर है।
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सुभाष ने कहा कि लोकतंत्र में बहस होनी चाहिए। किसी का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रकाश राज को एसआईआर प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो वह उचित मंच के सामने तथ्य और सबूत रख सकते हैं। इसके बजाय ‘भड़काऊ सड़कछाप बयानबाजी’ का सहारा नहीं लेना चाहिए।
सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
इस बीच, शनिवार को तेलंगाना पीपुल्स फ्रंट, कॉकरोच जनता पार्टी और दूसरे संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन हैदराबाद में आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को खत्म करने की मांग भी की। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम 2023 को रद्द करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कई पोस्टर भी दिखाए। इन पोस्टरों पर लिखा था- ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो (ज्ञानेश, अब काम खत्म है भाई!)!एक पोस्टर पर लिखा था- ‘ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए’। इसके अलावा पोस्टरों पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ जैसे संदेश भी लिखे थे।

