TATA Sons में एन चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने TATA Sons Board को पत्र भेजकर 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक की पूरी जानकारी मांगी है. उन्होंने बैठक में क्या हुआ, कौन-सी प्रोसेस अपनाई गई और उससे जुड़े सभी रिकॉर्ड देने को कहा है.
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सितंबर को भेजे गए ईमेल में नोएल टाटा ने कहा कि एन चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट 17 सितंबर की बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं थी. उनका कहना है कि यह मुद्दा बैठक में “NRC द्वारा ब्रीफिंग” के दौरान सामने आया था. नोएल टाटा ने यह भी पूछा कि बैठक के बाद कानूनी सलाह क्यों ली गई और उसका आधार क्या था.
नोएल टाटा ने बोर्ड से क्या-क्या मांगा?
- 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में अपनाई गई प्रोसेस की पूरी जानकारी.
- बैठक में एन चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट का मुद्दा किस आधार पर लाया गया, इसका विवरण.
- बैठक के बाद ली गई कानूनी राय और उसे लेने की वजह की जानकारी.
- बोर्ड बैठक की पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड.
- बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग.
हालांकि, इससे पहले भी नोएल टाटा ने दावा किया था कि 17 सितंबर की बैठक में कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ था. वहीं, इसी बैठक में एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के पद पर एक और पांच साल के लिए अपॉइंटमेंट करने का मामला सामने आया था.
टाटा ट्रस्ट्स ने अपॉइंटमेंट पर उठाए सवाल
टाटा ट्रस्ट्स ने एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर तीसरे बार री-अपॉइंटमेंट से जुड़े बोर्ड के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं. ट्रस्ट्स ने इस प्रस्ताव को अवैध और कानूनी रूप से अमान्य बताया है. ट्रस्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा ने बैठक में चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट के खिलाफ वोट किया था.
क्या है विवाद की असली वजह?
यह पूरा मामला टाटा संस के Articles of Association यानी कंपनी के नियमों में दिए गए कुछ प्रावधानों से जुड़ा है. इनमें नामित निदेशकों और बोर्ड चेयरमैन के निर्णायक वोट से जुड़े नियम शामिल हैं. टाटा संस के मुताबिक, नामित निदेशकों के बीच मत बराबर होने के बाद चेयरमैन के निर्णायक वोट के जरिए प्रस्ताव पास किया गया.
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