रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती का मुद्दा भारत-रूस सलाहकार समिति की बैठक में प्रमुखता से उठा। भारत सरकार ने बताया कि रूसी सेना में शामिल भारतीयों को जल्द से जल्द वापस लाने के लिए रूसी अधिकारियों से लगातार बातचीत चल रही है और इस मुद्दे को उच्च स्तर पर भी उठाया गया है। अब तक करीब 140 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से मुक्त कराया जा चुका है। वहीं, 55 ऐसे भारतीय नागरिकों के बारे में रूसी अधिकारियों के संपर्क में रहा जा रहा है, जिनके रूसी सेना में होने की जानकारी सामने आई है। भारत में कानून प्रवर्तन एजेंसियां ऐसे धोखेबाज एजेंटों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई कर रही हैं, जो भारतीयों को गुमराह करके रूसी सेना में भर्ती कराने में शामिल हैं।
यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिशों पर भी हुई चर्चा
भारत-रूस सलाहकार समिति की बैठक में यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने और शांति बहाल करने की दिशा में भारत की हालिया कोशिशों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई मुलाकात का जिक्र किया गया। उस दौरान पीएम मोदी ने साफ कहा था कि अब अंतहीन युद्ध का दौर खत्म होना चाहिए और युद्ध की जगह शांति की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।
विदेश मंत्री की यूक्रेन यात्रा और रूस-यूक्रेन से बातचीत का भी जिक्र
बैठक में विदेश मंत्री की पिछले महीने हुई यूक्रेन यात्रा का भी उल्लेख किया गया। इसके अलावा न्यूयॉर्क में रूस और यूक्रेन के विदेश मंत्रियों के साथ हुई उनकी मुलाकातों पर भी चर्चा हुई। इन बातचीत के दौरान भारत ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि अगर वह किसी भी तरह से युद्ध को खत्म कराने में मदद कर सकता है, तो इसके लिए तैयार है।
पुतिन ने भी मोदी की पहल को बताया अहम
भारत की शांति पहल का जिक्र रूस में आयोजित वल्दाई क्लब के कार्यक्रम में भी हुआ। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मॉस्को में कहा था कि शांति का रास्ता निकालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास आपसी रूप से स्वीकार्य समाधान तलाशने के अच्छे विचार हैं। बैठक में यूक्रेन के विदेश मंत्री की उन टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें उन्होंने भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की थी।
चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर से नॉर्दर्न सी रूट तक पर बात
भारत-रूस के बीच कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ाने वाले कई अहम प्रोजेक्ट भी बैठक के एजेंडे में रहे। चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और नॉर्दर्न सी रूट को लेकर दोनों पक्षों ने चर्चा की। इन परियोजनाओं को दोनों देशों के बीच व्यापार और संपर्क बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
ऊर्जा मामले को लेकर भारत ने फिर साफ किया अपना रुख
वहीं, ऊर्जा सहयोग पर भारत ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। इसके लिए भारत कई अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा की आपूर्ति बनाए रखने के पक्ष में है। यानी किसी एक देश या एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय आपूर्ति के कई विकल्प खुले रखना भारत की नीति का हिस्सा है।
रूस के साथ कारोबार बढ़ाने की तैयारी, सात सेक्टर पर खास नजर
व्यापार और निवेश के मुद्दे पर दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना साझा लक्ष्य है। इसके तहत रूस को भारतीय निर्यात बढ़ाने पर खास जोर दिया जा रहा है। ऑटोमोबाइल, फार्मा, खाद्य उत्पाद, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और कपड़ा इन सात क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए रूस में निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
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भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच FTA पर भी बातचीत
बैठक में भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA को लेकर भी बातचीत हुई। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार को आसान बनाना और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के रास्ते तलाशना है।


