15 सितंबर को सरकार ने घोषणा की है कि अब से यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत का MDR चार्जेस लगेगा. जिसका विरोध तभी से ही दुकानदार और व्यापारी संगठन व्यापक रूप से कर रहे हैं. अब हाल ही में देशभर के मोबाइल फोन रिटेलर्स ने घोषणा कर दी है कि वो 2 अक्टूबर को इसके खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन करेगें.
इसके तहत वो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के मौके पर No UPI Day मनाने वाले हैं. ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) ने इस विरोध का आह्वान किया है.
दुकानदार क्या करेंगे?
दरअसल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मोबाइल दुकानदार UPI से पेमेंट लेना बंद कर सकते हैं. इसके अलावा दुकानों पर लगे UPI QR कोड को काले कपड़े से ढककर सांकेतिक विरोध किया जाएगा. दुकानदारों का कहना है कि उनका विरोध UPI या डिजिटल पेमेंट के खिलाफ नहीं है, बल्कि नए शुल्क के खिलाफ है.
AIMRA की क्या मांग है?
AIMRA का कहना है कि अगर देश में डिजिटल पेमेंट और डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देना है, तो UPI को दुकानदारों के लिए Zero MDR यानी बिना किसी शुल्क के जारी रखना चाहिए. एसोसिएशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी इस शुल्क पर दोबारा विचार करने और छोटे व मध्यम मोबाइल दुकानदारों को राहत देने की मांग की है.
ये मोबाइल रिटेलर्स की चिंता
AIMRA का कहना है कि मोबाइल फोन खरीदने के लिए होने वाले ज्यादातर पेमेंट 2,000 रुपये से ज्यादा के होते हैं. ऐसे में 0.4% शुल्क का सीधा असर दुकानदारों की कमाई पर पड़ सकता है. एसोसिएशन के मुताबिक, अगर कोई छोटा दुकानदार हर महीने UPI के जरिए 5 लाख रुपये से 30 लाख रुपये तक का कारोबार करता है, तो उसे करीब 2,000 रुपये से 12,000 रुपये हर महीने एक्स्ट्रा खर्च उठाना पड़ सकता है.
नए UPI-MDR चार्जेस के बारे में
बता दें कि सरकार की घोषणा के मुताबिक नए UPI-MDR चार्जेस 15 अक्टूबर से लागू होने वाले हैं. इसी दिन से दुकानदारों को जब भी कोई ग्राहक 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट करेगा तो उस पर 0.4% MDR लागू होगा. हालांकि पर्सन टू पर्सन यानी P2P पेमेंट पर यह शुल्क नहीं लगेगा. 2,000 तक के छोटे UPI पेमेंट भी इस शुल्क से बाहर रखे गए हैं.
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