उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की सुगबुगाहट तो तेज है, लेकिन जमीनी स्तर पर औपचारिक वार्ता की शुरुआत अभी तक नहीं हो सकी है। दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग की बातचीत आगे बढ़ाने के लिए न तो अब तक कोई आधिकारिक बैठक हुई है और न ही लोकसभा चुनाव की तरह किसी समन्वय समिति का गठन किया गया है। तमाम राजनीतिक चर्चाओं के बीच दोनों पार्टियां फिलहाल एक-दूसरे के रुख को भांपते हुए वेट एंड वॉच की रणनीति पर चलती दिखाई दे रही हैं।
राजनीतिक सूत्र मानते हैं कि सीट बंटवारे पर मीडिया बयानों के जरिये प्रेशर पॉलिटिक्स पूरी तरह से हावी है। एक तरफ कांग्रेस पार्टी 2017 के गठबंधन और हालिया लोकसभा चुनाव के बेहतर नतीजों के आधार पर अपनी मजबूत दावेदारी जता रही है। कांग्रेस राज्य में करीब 100 से 120 सीटों के दावे के साथ बातचीत की मेज पर आना चाहती है।
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी केवल किसी पुराने फॉर्मूले या गणितीय आंकड़े के आधार पर सीटें बांटने के मूड में नहीं है। सपा नेतृत्व का स्पष्ट रुख है कि सीटों का आवंटन केवल सीटों की संख्या पर नहीं, बल्कि जीतने की क्षमता (विनेबिलिटी) के ठोस आधार पर तय होगा। सपा नेतृत्व का मानना है कि उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और उनके बीच है, इसलिए केवल उन्हीं सीटों पर कांग्रेस को अवसर दिया जाना व्यावहारिक होगा, जहां उसकी स्थिति वास्तव में मजबूत हो।

