कलकत्ता हाईकोर्ट ने कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव उम्मीदवार मिलन प्रधान को बड़ी राहत दी है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने पश्चिम बंगाल पुलिस को 2007 के एक मामले में 12 अक्तूबर तक प्रधान के खिलाफ कोई आगे की कार्रवाई करने से रोक दिया। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में प्रधान को गिरफ्तार नहीं माना जाएगा।
गुरुवार को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच ने आदेश दिया कि जिन दो मामलों में प्रधान पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं, उनके अलावा राज्य पुलिस कोई नया मामला दर्ज नहीं कर सकती और न ही उन्हें किसी नए मामले में गिरफ्तार दिखा सकती है।
जिस मामले में नई गिरफ्तारी दिखाई गई, कोर्ट ने उसी पर सवाल उठाया
मिलन प्रधान के वकील ने अदालत को बताया कि वह पहले से ही हिरासत में हैं और इसके बावजूद उन्हें एक अन्य 2007 के मामले में गिरफ्तार दिखाया गया। इस मामले में निचली अदालत ने उन्हें सात अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि इस मामले का प्रोडक्शन वारंट प्रधान को दिया गया था।
19 साल पुराने मामले में अब कार्रवाई पर कोर्ट को हैरानी
जस्टिस भट्टाचार्य ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि मामला 2007 का है, लेकिन जांच अधिकारी ने 19 सितंबर 2026 को प्रधान को इसमें ‘शो अरेस्ट’ करने की मांग की। अदालत ने पुलिस को फिलहाल इस मामले में कोई कदम नहीं उठाने का निर्देश दिया है।
दो बेंचों ने कहा- मिलन को चुनाव लड़ने दिया जाए
इसी दिन हाईकोर्ट की दूसरी पीठ ने भी मिलन प्रधान को नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने देने की राय जताई। जस्टिस तीर्थंकर घोष चार मामलों में प्रधान की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने राज्य सरकार को इन मामलों की केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया और कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार को चुनाव लड़ने दिया जाना चाहिए। मामले में आगे की सुनवाई शुक्रवार को होगी।
18 सितंबर को हुई थी गिरफ्तारी
मिलन प्रधान को 18 सितंबर को नंदीग्राम और खेजुरी थानों में दर्ज 2007 के मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। ये मामले 2007 में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े हैं। अलग-अलग मामलों में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और उन्होंने चार मामलों में जमानत की मांग की है।
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मिलन की पत्नी ने क्या कहा?
इस बीच, मिलन की पत्नी अर्पिता प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो मैसेज पोस्ट करके अपने पति की गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, ‘कांग्रेस द्वारा पार्टी उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद मेरे पति को गिरफ्तार कर लिया गया। वे नियमित रूप से वोट देने जाते थे और त्योहारों के समय इलाके में ही रहते थे। इतने लंबे समय तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। अब, कांग्रेस द्वारा उन्हें उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?’
अब नंदीग्राम चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?
नंदीग्राम में छह अक्तूबर को उपचुनाव होना है और चुनाव प्रचार 4 अक्तूबर को खत्म होगा। ऐसे में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बीच हाईकोर्ट की यह राहत महत्वपूर्ण है। फिलहाल एक 2007 के मामले में 12 अक्तूबर तक नई कार्रवाई पर रोक है, जबकि बाकी मामलों में उनकी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।


